छह मई को कमीशन की कार्यवाही शुरू तो हुई लेकिन पूरी नहीं हो सकी। सात मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर एडवोकेट कमिश्नर बदलने की मांग कर दी। वादी पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद की बैरिकेडिंग के अंदर तहखाने समेत अन्य उल्लिखित स्थलों का निरीक्षण करने का स्पष्ट आदेश देने की अपील की गई थी।
हालांकि तहखाने की वीडियोग्राफी कराने की वादी पक्ष की अपील पर भी न्यायालय ने कोई टिप्पणी नहीं की है। सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने बताया कि नोटिस के बाद कमीशन की कार्यवाही शुरू होगी।
काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद।
- फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के मामले में अदालत ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। परिसर के तहखाने तक वीडियोग्राफी व सर्वेे कराने संबंधी आवेदन को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। पुलिस आयुक्त व जिलाधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए अदालत ने आदेश दिया है कि कि ताला खोलकर या तोड़कर जैसे भी हो, पूरे परिसर के सर्वे की कार्यवाही पूरी करवाएं।
कोर्ट ने प्रशासन पर भी तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा है कि प्रशासन को सुस्पष्ट भाषा क्यों समझ में नहीं आती है? सर्वे की कार्यवाही पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और अगली सुनवाई के लिए 17 मई की तारीख तय की गई है। अदालत ने आदेश में कहा है कि कमीशन की कार्यवाही में किसी की ओर से कोई बाधा डाले जाने पर जिला प्रशासन प्राथिमिकी दर्ज करवाकर सख्त विधिक कार्यवाही करे।
इसके साथ ही डीजीपी और मुख्य सचिव को पूरे मामले की मॉनिटरिंग का निर्देश दिया है और कहा है कि यह सुनिश्चित करें कि जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त इस मामले में लापरवाही न करें। दोनों को पत्र भी भेजा जाएगा।
अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र को हटाने की मांग को खारिज करते हुए अदालत ने आदेश दिया है कि किसी कीमत पर सर्वे की कार्यवाही नहीं रुकेगी। अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्र को आगे का सर्वे जारी रखने का आदेश देते हुए उनके सहयोग के लिए विशेष सर्वे अधिवक्ता के रूप में अजय प्रताप सिंह और विशाल सिंह को तैनात किया गया है। इनमें किसी भी अधिवक्ता की गैरमौजूदगी में काम नहीं रुकेगा। सर्वे की कार्यवाही अब हर दिन सुबह आठ बजे से 12 बजे तक होगी।
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करने वाली टीम
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18 अगस्त 2021 को राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, मंजू व्यास, सीता साहू और रेखा पाठक ने संयुक्त रूप से सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में याचिका दायर की थी, जिसमें मांग की गयी थी कि काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी और विग्रहों को 1991 की पूर्व स्थिति की तरह नियमित दर्शन-पूजन के लिए सौंपा जाए। आदि विश्वेश्वर परिवार के विग्रहों की यथास्थिति रखी जाए।
इस मामले में आठ अप्रैल 2022 को सुनवाई के क्रम में अदालत ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया। 18 अप्रैल 2022 को जिला प्रशासन ने शासकीय अधिवक्ता के जरिये याचिका दाखिल कर वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी पर रोक लगाने की मांग की।
19 अप्रैल 2022 को अधिवक्ता आयुक्त ने सर्वे करने की तिथि से अदालत को अवगत कराया। 19 अप्रैल 2022 को विपक्षी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कमीशन कार्यवाही रोकने की गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। 20 अप्रैल 2022 को अदालत ने सुनवाई पूरी की, फैसला सुरक्षित रखा।
26 अप्रैल 2022 को निचली अदालत ने ईद के बाद सर्वे की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। आदेश के तहत अधिवक्ता आयुक्त ने छह मई को सर्वे करने से कोर्ट को अवगत कराया था। दो मई 2022 को वादी पक्ष की महिलाओं ने अपर पुलिस आयुक्त को प्रार्थना पत्र देकर सुरक्षा की गुहार लगाई।
पांच मई 2022 को अधिवक्ता आयुक्त की कमीशन कार्यवाही के दौरान एकत्रित साक्ष्यों व सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए अदालत से अपील की गई। अदालत ने पुलिस आयुक्त को साक्ष्यों को सुरक्षित रखवाने का आदेश दिया। छह मई को कोर्ट कमिश्नर ने ज्ञानवापी परिसर में पक्षकारों की उपस्थिति में कमीशन कार्यवाही शुरू की, जो पहले दिन पूरी नहीं हो सकी।
अगले दिन अधिवक्ता आयुक्त को ज्ञानवापी मस्जिद में जाने से रोका गया और विरोध के चलते कमीशन की कार्यवाही रोक दी गई। नौ मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने एडवोकेट कमिश्नर बदलने के लिए कोर्ट में अर्जी दी। इस मामले में 10 व 11 मई को लंबी बहस हुई और बृहस्पतिवार को इस पर फैसला आया।