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ज्ञानवापी प्रकरण: सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका पर आपत्ति, अगली सुनवाई 27 जुलाई को

Fri, 09 Jul 2021 09:31 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

आपत्ति में कहा गया कि सर्वेक्षण आदेश से मालिकान का निर्णय नहीं होना है न ही इससे मूल मुकदमे पर कोई प्रभाव पड़ेगा।  प्रति आपत्ति दाखिल करने के लिए सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद को आपत्ति की प्रति सौंपी गई और सुनवाई की अगली तारीख 27 जुलाई नियत की गई। 
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पुरातात्विक सर्वेक्षण आदेश के खिलाफ दाखिल की गई है निगरानी याचिका
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विस्तार
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ज्ञानवापी प्रकरण में पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका पर लार्ड विश्वेश्वर की ओर से प्रभारी सत्र न्यायाधीश की अदालत में शुक्रवार को आपत्ति दाखिल की गई। प्रति आपत्ति दाखिल करने के लिए सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद को आपत्ति की प्रति सौंपी गई और सुनवाई की अगली तारीख 27 जुलाई नियत की गई। 

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लार्ड विश्वेश्वर और वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से आपत्ति अधिवक्ता अमरनाथ शर्मा ने दाखिल की और कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट सिविल जज सीनियर डिवीजन ने जो रडार पद्धति से केंद्रीय पुरातात्विक विभाग को पांच विशेषज्ञ समिति की देखरेख में सर्वेक्षण का आदेश दिया है, वह उसके अधिकार क्षेत्र में है और अंतरिम आदेश है, जिसके खिलाफ निगरानी याचिका सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 115 के तहत पोषणीय नहीं है।

अधिवक्ता अमरनाथ शर्मा का यह भी कहना था कि जो पुरातात्विक सर्वेक्षण की रिपोर्ट आएगी, वह साक्ष्य एक्ट की धारा 45 व 49 के तहत बतौर साक्ष्य मान्य है। इस आशंका को निर्मूल बताया कि रडार पद्धति की खोदाई से ज्ञानवापी परिसर के स्वरूप में कोई बदलाव होगा, कहा कि खोदाई दूर से होगी और परिसर का वजूद कायम रहेगा। आपत्ति में कहा गया कि सर्वेक्षण आदेश से मालिकान का निर्णय नहीं होना है न ही इससे मूल मुकदमे पर कोई प्रभाव पड़ेगा। 

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अदालत में एक अन्य पक्षकार हरिहर पांडेय की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र प्रताप पांडेय ने वकालतनामा दाखिल किया। अदालत में सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से दाखिल निगरानी याचिका विचारार्थ जहां स्वीकार कर ली गई है, वही अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की तरफ से दाखिल निगरानी याचिका सुनवाई के लिए पोषणीय है या नहीं, अभी इस मुद्दे पर सुनवाई होनी है।

अदालत में अप्रैल 2021 में पुरातात्विक सर्वेक्षण रडार तकनीक से कराने के साथ पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम की देखरेख में सर्वे कराने के आदेश को कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के बाहर का बताते हुए चुनौती दी गई है। साथ ही निगरानी याचिका निस्तारित होने तक सर्वे के आदेश को स्थगित करने का अनुरोध किया गया है। अब इन मुद्दों पर 27 जुलाई को सुनवाई के लिए प्रभारी सत्र न्यायाधीश की अदालत ने तिथि नियत कर दी।
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