यह वाद किसी ढांचे के हटाने या परिवर्तन का नहीं है। मात्र दर्शन पूजन के लिए है। वक्फ में कुछ दर्ज हो जाने से वह वक्फ प्रॉपर्टी नहीं हो जाती, उसकी इंट्री और वैधता जांचने का अधिकार कोर्ट को है। वही दूसरी तरफ अन्य पक्षकारों के विरोध के बीच वादिनी लक्ष्मी देवी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने भी पांच मिनट दलील रखी और कहा कि प्लेस ऑफ वर्शिप और प्लेस ऑफ प्रेयर दोनों अलग है।
प्लेस ऑफ वर्शिप में पूजा का अधिकार है जो एक बार मूर्ति स्थापित होने के बाद उसके विसर्जित होने तक बना रहता है, जबकि प्लेस ऑफ प्रेयर में प्रार्थना यानि नमाज की बात कही गई है, जिसका स्थान बदला जा सकता है।