वादी पक्ष के अधिवक्ता ने पुराण और धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए न्यायालय से अनुरोध किया कि जिलाधिकारी सम्यक रूप से उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार राग, भोग व पूजन-अर्चन की व्यवस्था करें। अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने अदालत में भविष्य पुराण का जिक्र करते हुए कहा कि शिवलिंग के साथ पाप किया जा रहा है।
स्वामी अविमुकेश्वरानंद तीन जून से अन्न त्यागकर अनशन पर हैं। ऐसे में बाल स्वरूप देवता शिवलिंग को राग, भोग, पूजन-अर्चन की अनुमति न्यायसंगत है। अधिवक्ता चंद्रशेखर सेठ व धीरेंद्रनाथ शर्मा ने भी राग भोग के लिए अनुमति देने की याचना की। सुनवाई पूरी होने के बाद जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित कर ली।
वाद दायर करने के साथ ही अधिवक्ताओं की ओर से इसे त्वरित वाद में दर्ज करने की मांग की गई थी। जिला अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में दीवानी अदालत के ग्रीष्मकालीन अवकाश का हवाला देते हुए त्वरित वाद में दर्ज कर भगवान श्री आदिविश्वेश्वर का राग भोग, पूजन-अर्चन के लिए ग्रीष्मकालीन वेकेशन जज को सुनवाई के लिए आदेश दिए जाने की मांग भी की गई है।
ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग होने की जानकारी के बाद भी हिंदू धर्मावलंबियों की धार्मिक भावना आहत करने के आरोप में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव सहित सैकड़ों अज्ञात पर मुकदमा दर्ज करने के वाद को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सर्वोत्तमा नागेश वर्मा की अदालत ने सुनवाई के योग्य ही नहीं माना है।
अदालत ने मंगलवार को वादी पक्ष पर सख्त टिप्पणी के साथ वाद को खारिज कर दिया। ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने वाली जगह पर वजू स्थल बनाकर धार्मिक भावना आहत करने के मामले में दाखिल वाद को खारिज करते हुए अदालत ने टिप्पणी की, कि ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में सिविल वाद और सर्वे के तथ्य अलग हैं। यह मामला संवेदनशील है और सिविल न्यायालय में विचाराधीन है।
ऐसा प्रतीत होता है कि वादी ने संवेदनशील मुद्दे में व्यक्तिगत रूप से अपना हित साधने और लाइम लाइट में बने रहने के लिए आवेदन दिया है। अदालत ने कहा कि यह कदापि उचित नहीं है। ऐसे में वाद पोषणीय (सुनने योग्य) नहीं होने के कारण खारिज किया जाता है।
यहां बता दें कि प्रार्थी राजा आनंद ज्योति सिंह की ओर से विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर मिले शिवलिंग में जानकारी के बाद भी वजू स्थल बनाया गया था। वहां गंदा पानी गिराए जाने के चलते हिंदू धर्मावलंबियों की धार्मिक भावना आहत हुई है।