प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के प्रार्थना पत्र पर पहली बार सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी की अदालत ने आठ अप्रैल 2021 को ज्ञानवापी में रडार तकनीक से एएसआई को सर्वे का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ अपील किए जाने पर सितंबर 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे पर रोक लगा दी थी। फिलहाल, मुकदमा अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। कभी भी आदेश आ सकता है।
12 मई 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में मिली शिवलिंग जैसी आकृति की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे का आदेश दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। यह मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के आदेश दिए हैं। सील वजूखाना क्षेत्र में ही शिवलिंग जैसी आकृति मिली थी।
21 जुलाई 2023 को जिला अदालत डॉ अजय कृष्ण विश्ववेश की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर स्थित सील वजूखाना को छोड़कर शेष अन्य हिस्से के सर्वे का आदेश एएसआई को दिया था। 24 जुलाई को एएसआई ने सर्वे का काम शुरू किया तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उस पर 26 मई की शाम पांच बजे तक रोक लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 25, 26 और 27 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
27 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे के काम पर लगी रोक जारी रखते हुए आदेश सुनाने के लिए तीन अगस्त की तिथि तय कर दी। तीन अगस्त को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्याय के हित में ज्ञानवापी में वैज्ञानिक सर्वेक्षण जरूरी है। हाईकोर्ट के इस आदेश को मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शुक्रवार (चार अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट ने भी सर्वे पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया।
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