स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि किसी भी दशा में प्रकट शिवलिंग अपूजित नहीं रहना चाहिए। जब तक आदि विश्वेश्वर की पूजा शुरू नहीं होती है तब तक पूरे देश में प्रतीकात्मक पूजन होगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जब तक आदि विश्वेश्वर की पूजा शुरू नहीं होती है तब तक पूरे देश में प्रतीकात्मक पूजन होगा। देश के सात लाख गांव व चार लाख मोहल्लो में आदि विश्वेश्वर की प्रतीक पूजा होगी। इसकी शुरुआत शुक्रवार से केदारेश्वर मंदिर में पूजन के साथ होगी।
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गुरुवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में प्रेसवार्ता के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि पूरे देश के सनातनधर्मी अपने अपने गांव एवं मोहल्लों में स्थित शिव मंदिर में स्थापित किसी भी शिवलिंग पर भगवान आदि विश्वेश्वर का जलाभिषेक करेंगे। किसी भी दशा में शिवलिंग अपूजित नहीं रहना चाहिए।
मैंने किसी किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया
सनातनधर्मियों को दोष-पाप से बचाने के लिए ज्योतिष व द्वारिकापीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने हमें प्रभु की पूजा के लिए काशी भेजा था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हमने प्रशासन के सामने कोई जिद नहीं की और ना तो किसी कानून का उल्लंघन किया।
कोर्ट ने शिवलिंग के स्थान को सामान नहीं अपितु प्राणवान और सम्माननीय माना है। हर एक आस्तिक हिंदू प्रकट आदि विश्वेश्वर की पूजा करना चाहता है स्थानीय स्तर पर किसी शिवमंदिर में प्रतीक रूप में विश्वेश्वर ज्योर्तिलिंग की पूजा करेंगे।