जौनपुर। लॉकडाउन ने भले ही तमाम तरह की मुश्किलें बढ़ाई हैं लेकिन इसके कुछ सुखद परिणाम भी दिख रहे हैं। लॉकडाउन के कारण शहर के मध्य से प्रवाहित गोमती नदी का पानी साफ हुआ है। नदी में घाटों के किनारे गंदगी और कूड़े-कचरे का ढेर अब नजर नहीं आ रहा। कलकल, अविरल धारा से लोग अब आचमन में परहेज नहीं कर रहे।
पीलीभीत से निकली गोमती नदी शाहजहांपुर, खीरी, सीतापुर, लखनऊ, सुल्तानपुर होते हुए जौनपुर आती है और फिर गाजीपुर जिले की सीमा पर गंगा में समाहित हो जाती है। अंतिम छोर पर स्थित होने के कारण बड़े शहरों में नदी किनारे स्थापित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रसायन युक्त सीवेज नदी के पानी को प्रदूषित करता है। इस कारण सामान्य दिनों में नदी का पानी काला नजर आता है।
शहर की सराफा मंडी में आभूषणों की सफाई में इस्तेमाल होने वाला तेजाब का पानी भी नालियों के जरिए नदी में गिरता है। शहरी क्षेत्र में ही करीब सात बड़े नाले नदी में गिरते हैं, जिनमें घरेलू सीवेज के अलावा दुकानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का कचरा भी होता है। लॉकडाउन के कारण औद्योगिक इकाइयां बंद हैं। शहर की सराफा मंडी स्थित अन्य प्रतिष्ठानों में काम ठप है।
इन सबका असर गोमती नदी के पानी पर दिख रहा है। काले और गहरे रंग में दिखने वाला पानी अब अपने मूल रंग में दिख रहा है। शहर के हनुमान घाट स्थित मंदिर के पुजारी पं.गणेश प्रसाद पांडेय भी इसे स्वीकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि गोमती नदी में प्रदूषण का स्तर इतना खराब हो गया था कि पानी छूने की इच्छा भी नहीं होती थी। घाट की सीढ़ियां कचरे से पटी रहती थीं।
अब ऐसी स्थिति नहीं है। पानी से आचमन भी किया जा सकता है। ताड़तला निवासी मनोज कुमार कहते हैं कि गर्मी के दिनों में पानी कम होने से नदी में गंदगी और भी अधिक दिखती थी। इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता कहते हैं कि औद्योगिक इकाइयों का रसायनयुक्त हानिकारक सीवेज न आने से नदी का पानी साफ दिख रहा है। पहले ही अपेक्षा नदी का पानी स्वच्छ हुआ है, लेकिन घरों से निकलने वाला कचरा यथावत है। इस पर भी रोक लगाने के लिए यह अच्छा मौका है।