नए अध्यक्ष और कार्यकारिणी के सामने चुनौतियां भी होंगी। इसमें आर्यभाषा पुस्तकालय के जीर्णोद्धार के साथ ही 128 वषोZं की हिंदी की थाती को सहेजना प्रमुख है। सभा का मुख्य भवन जिसमें हिंदी का सबसे पुराना आर्यभाषा पुस्तकालय है, वह सवा सौ साल पुरानी एक हेरिटेज इमारत है। इसको तत्काल सघन देखरेख और सरंक्षण की जरूरत है, जबकि रखरखाव के अभाव में वह जीर्णशीर्ण होकर गिरने की कगार पर है। भूतल पर उसका एक हिस्सा ढह भी गया है।
चुनाव में दूसरे पक्ष से खड़े संस्कृतिकर्मी व्योमेश शुक्ल ने बताया कि अगर उनकी कार्यकारिणी चुनाव जीतती है तो उनकी प्राथमिकता में आर्यभाषा पुस्तकालय का जीर्णोद्धार शामिल है। इसके साथ ही पुस्तकालय में उपलब्ध पांडुलिपियों, पुस्तकों, हस्तलेखों का इंटेलैक्चुअल ऑडिट कराएंगे। राज्य और केंद्र सरकार से बातचीत कर जरूरत के अनुरूप परिसर का सुंदरीकरण भी कराया जाएगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तरह प्रचारिणी सभा को विकसित किया जाएगा। कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों को हल करना, नई नियुक्तियां और आय के स्रोत विकसित करना प्राथमिकता में होंगी। देश भर के साहित्यसेवी व बुद्धिजीवियों को सीधे नागरी प्रचारिणी से जोड़ा जाएगा।
नागरी प्रचारिणी सभा में पिछले 15 वर्षों से चल रहा कानूनी विवाद अब पटाक्षेप की तरफ है। संस्कृतिकर्मी व्योमेश शुक्ल की लिखित आपत्ति पर चुनाव के बाद अब मतगणना भी कराई जाएगी। सहायक निबंधक सोसाइटीज को 2004 की साधारण सभा के सदस्यों की सूची के आधार पर जिला प्रशासन की देखरेख में चुनाव नौ जून 2022 में हुआ था।
नवगीतकार सुरेंद्र वाजपेयी ने बताया कि आर्यभाषा पुस्तकालय भाषा और साहित्य का एक अनूठा संग्रहालय है। हस्तलेखों, अनुपलब्ध और दुर्लभ ग्रंथों का ऐसा संकलन कहीं और मिलना मुश्किल है। आधी सदी पहले तक हिंदी के जानेमाने विद्वान अपने निजी पुस्तक-संग्रह इस पुस्तकालय को प्रदान करते रहे थे। दिग्गज विद्वानों की लगभग पचीस वर्षों की साझा मेहनत के फलस्वरूप हिंदी शब्दसागर नामक हिंदी का पहला, सबसे बड़ा, समावेशी और प्रमाणिक शब्दकोष तैयार हुआ। सभा ने ही आज से सौ साल पहले एमए की कक्षाओं के लिए हिंदी का पहला पाठ्यक्रम बनाया था।
नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना क्वींस कॉलेज की नवीं कक्षा के तीन छात्र बाबू श्यामसुंदरदास, पं. रामनारायण मिश्र और शिवकुमार सिंह ने इसी कॉलेज के छात्रावास के बरामदे में बैठकर की थी। बाद में इसकी स्थापना की तिथि इन्हीं महानुभावों ने 16 जुलाई 1893 निर्धारित की और आधुनिक हिंदी के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र के फुफेरे भाई बाबू राधाकृष्ण दास इसके पहले अध्यक्ष हुए।
नागरी प्रचारिणी सभा के चुनाव का परिणाम छह अप्रैल को घोषित होगा। जिला राइफल क्लब में सुबह नौ बजे से होने वाली मतगणना के लिए तीन टेबल बनाई गई है। नौ जून 2022 को मतदान हुआ था और कुल 228 डाक मत पड़े थे। हाईकोर्ट के आदेश पर मतपेटियों को सुरक्षित रखवा दिया गया था। हाईकोर्ट के स्टे आर्डर हटाने के आदेश के बाद मतगणना कराई जा रही है। उपजिलाधिकारी पिंडरा को रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर विकास कुमार पांडेय व मनोज कुमार सिंह को बनाया गया है। मतगणना में नौ कर्मचारियों को लगाया गया है। यहां बता दें कि नागरी प्रचारिणी सभा में 944 मतदाता हैं और 262 मत पड़े थे। इसमें 228 डाक से और 34 मत बूथ पर डाले गए थे।