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बीएचयू में सबसे अलग थी अप्पा जी की क्लास, संगीत-मंचकला संकाय में विजिटिंग प्रोफेसर रहीं गिरिजा देवी

Thu, 26 Oct 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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गिरिजा देवी - फोटो : SELF
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बनारस घराने की ख्यात ठुमरी गायिका गिरिजा देवी का बीएचयू से गहरा रिश्ता रहा। यहां संगीत एवं मंच कला संकाय में सन् 1991-92 में वे बतौर विजिटिंग प्रोफेसर तैनात रहीं। उनके निधन की सूचना से बुधवार को संकाय में दु:ख भरी खामोशी पसरी थी।
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हर कोई उनकी ही चर्चा कर रहा था। फिलहाल इसी संकाय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत उनकी तीन शिष्याओं का कहना है कि उनकी क्लास सबसे अलग थी। कभी कोई गलती हुई तो अप्पा जी ने डांटा-फटकारा नहीं बल्कि बड़े सहज-सरल भाव से समझाया।

सप्ताह में तीन दिन शाम चार से छह बजे तक उनकी क्लास मुक्ताकाशीय मंच के पास प्रार्थना कक्ष में लगती थी। परिसर में अंतिम बार दिसंबर 2016 में सांस्कृतिक महोत्सव में गिरिजा देवी ने मंच पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया था।
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प्रो. रेवती साकलकर ने बताया कि किसी का रहना तब समझ में आता है जब वह नहीं रहता है। ठुमरी, दादरा, कजरी में उनका कोई जोड़ नहीं। कक्षा में समय की बेहद पाबंद थीं।

डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय का कहना है कि अप्पाजी का न होना शास्त्रीय संगीत जगत की अपूरणीय क्षति है। उनका स्थान कोई और नहीं ले सकता। उनकाजाना बहुत खल रहा है।  
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प्रो. शारदा वेलंकर का कहना है कि अप्पा जी बनारसी ठुमरी का पर्याय थीं। पढ़ाई के दौरान अप्पा से जो कुछ भी सीखा वह कभी नहीं भूल सकती।  

प्रो. संगीता पंडित ने बताया कि ठुमरी गायिकी का जो ये स्थान रिक्त हुआ है, उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती है। ठुमरी मतलब गिरिजा देवी।
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