Varanasi News: आनुवंशिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम तकनीकी विकास के साथ आया, जिसने डीएनए के आधार पर संपूर्ण जीनोम की सिक्वेंसिंग हुई और वर्तमान ओमिक्स क्रांति हुई। प्रो. एके सिंह ने बताया कि वर्कशॉप के लिए देश भर से 208 प्रविष्टियां आई थीं। इनमें 25 शोधार्थियों का चयन किया गया है।
जल्द ही किसी भी इंसान के संपूर्ण जीनोम को सीक्वेंस करने में मात्र 100 अमेरिकी डॉलर (8 हजार रुपये) का खर्च आएगा। इससे हम मानव विज्ञान को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। जीन सिक्वेंसिंग से प्राप्त परिणामों की व्याख्या सबसे चुनौतीपूर्ण होगी। फिर भी, मानव के पास उसके अतीत, वर्तमान और भविष्य की कुंजी होगी। यह प्रक्रिया लगातार सस्ती और बेहतर होती जा रही है।
विज्ञापन
ये बातें शुक्रवार को मोनाश विश्विद्यालय मलेशिया के जीनोमिक्स के डायरेक्टर प्रोफेसर कासिम अयूब ने बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में कहीं। प्रो. अयूब ने कहा कि ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट (जिसमें मानव जीनोम का पहली बार पता चला) को पूर्ण करने में 2.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2 खरब रुपये) की लागत लगी।
वहीं वर्ष 2007 में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (8 अरब रुपये) की लागत से एक व्यक्तिगत मानव के संपूर्ण जीनोम सीक्वेंस को पूरा किया गया। दस साल बाद, 1000 अमेरिकी डॉलर की लागत लगने लगी। प्रोफेसर अयूब 1000 जीनोम प्रोजेक्ट और गोरिल्ला जीनोम प्रोजेक्ट के भी सहभागी थे। उन्होंने बताया कि आनुवंशिकी के विज्ञान की नींव लगभग 150 साल पुराने वंशानुक्रम के सिद्धांतों पर आधारित है।
विज्ञापन
आनुवंशिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम तकनीकी विकास के साथ आया, जिसने डीएनए के आधार पर संपूर्ण जीनोम की सिक्वेंसिंग हुई और वर्तमान ओमिक्स क्रांति हुई। प्रो. एके सिंह ने बताया कि वर्कशॉप के लिए देश भर से 208 प्रविष्टियां आई थीं। इनमें 25 शोधार्थियों का चयन किया गया है।
इस दौरान कार्यशाला के संयोजक प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे, प्रोफेसर मधु तापडिया, डॉ. समीर गुप्ता, डॉ. राहुल मिश्र, डॉ. प्रज्ज्वल प्रताप सिंह सहित विभिन्न राज्यों से आये शोधार्थी मौजूद थे।