फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

BHU: अस्पताल के एमसीएच विंग जाने वाले गेट पर ताला, रास्ता पूछती रहीं गर्भवती महिलाएं; कई मीटर तक चलीं पैदल

Mon, 27 Oct 2025 12:25 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

एमसीएच विंग के पास कई लोगों ने अपने वाहन खड़े कर दिए थे। गेट पर ताला बंद देख गर्भवती महिलाएं और तीमारदार बिल्डिंग में जाने का रास्ता ढूंढ रहे थे। महिलाओं को पदयात्रा करनी पड़ी, जिसे कारण उन्हें काफी दिक्कत हुई।
विज्ञापन
एमसीएच विंग पर जाने वाले गेट पर ताला बंद। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

BHU Hospital Varanasi: बीएचयू अस्पताल के एमसीएच विंग जाने वाले गेट पर रविवार को ताला लटकता दिखा। इससे एमसीएच विंग की इमरजेंसी तक जाने में गर्भवती महिलाओं, तीमारदारों को परेशानी हुई। लोग सुरक्षा कर्मियों, कर्मचारियों से एमसीएच विंग में जाने का मार्ग पूछते रहे। 

विज्ञापन


एमसीएच विंग में गर्भवती महिलाओं के लिए ओपीडी चलने के साथ ही भूतल पर ट्रायज एरिया में इमरजेंसी में आने वाली महिलाओं की प्राथमिक जांच की व्यवस्था है। यहां जाने के लिए एक गेट अस्पताल के एमएस आफिस के बगल में हैं जबकि दूसरा रास्ता ऑक्सीजन प्लांट के बगल में बने गेट से भी है।

Trending Videos

तीमारदारों को हुई काफी सुविधा

रविवार की दोपहर 12 बजे एमएस आफिस के बगल वाले गेट पर ताला लटकता रहा जबकि विश्राम कुटीर के सामने वाला गेट भी बंद रहा। इस तरह की स्थिति तब है जब एमसीएच विंग में वाराणसी के साथ ही आसपास के जिलों से भी गर्भवती महिलाओं को गंभीरावस्था में बीएचयू रेफर किया जाता है। 

अगर गेट खुला रहेगा तब एंबुलेंस से किसी मरीज के आने पर वह एमसीएच विंग की बिल्डिंग के ठीक पहले तक पहुंच जाएगी, यहां से स्ट्रेचर के सहारे अंदर भी ले जाया जा सकेगा।
एमसीएच विंग जाने वाले मार्ग के गेट को क्यों बंद रखा गया है। इस बारे में चिकित्सा अधीक्षक से बातचीत की जाएगी। कोशिश की जाएगी कि एंबुलेंस के आने पर गर्भवती महिलाओं को विंग तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो। जिस गेट के पास गाड़ियां खड़ी हो रही हैं, उसको भी हटवाया जाएगा। - प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू
विज्ञापन

अस्पतालों की छोटी पर्ची पर लगेगी ओपीडी की मुहर
जिले के सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों द्वारा मरीजों को दवाओं के नाम की जो छोटी पर्ची दी जाती है, उस पर ओपीडी की मुहर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। अब तक इस तरह की व्यवस्था न होने से बाहर की दवा लिखने पर रोक लगाना मुश्किल होता था। चार दिन पहले हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में हुए इस फैसले को अमल में लाने की तैयारी में स्वास्थ्य विभाग जुट गया है। 

सरकारी अस्पतालों में जब भी स्वास्थ्य मंत्री, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी का दौरा होता है तो मरीजों, तीमारदारों की ओर से बाहर की दवा लिखी पर्ची देने की शिकायत की जाती है। इसमें डॉक्टर का नाम और किस ओपीडी से पर्ची मिली, इसका जिक्र नहीं रहने से यह पता नहीं चल पाता था कि किस डॉक्टर ने दवा लिखी है। जहां एक ओर अधिकारी कार्रवाई करने की चेतावनी देते हैं, वहीं जन औषधि केंद्र जो खुले हैं, वहां पर्याप्त दवाइयां भी नहीं रहती हैं। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

24 अक्तूबर को सीडीओ की अध्यक्षता में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सीडीओ ने बाहर की दवा लिखने पर नाराजगी जताते हुए जन औषधि केंद्रों पर मानक के अनुसार सभी दवाएं रखने, डॉक्टरों को दवा की पर्ची पर मुहर लगाने के निर्देश दिया था। 

अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सीएमओ डाॅ. संदीप चौधरी ने बताया कि इसकी शुरूआत सीएचसी से कर दी गई है। जल्द ही अस्पतालों में भी इसको लागू किया जाएगा। सीएचसी के अधीक्षक और संबंधित अस्पतालों के सीएमएस, एसआईसी पर इसका पालन करवाने की जिम्मेदारी रहेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें