रविवार की दोपहर 12 बजे एमएस आफिस के बगल वाले गेट पर ताला लटकता रहा जबकि विश्राम कुटीर के सामने वाला गेट भी बंद रहा। इस तरह की स्थिति तब है जब एमसीएच विंग में वाराणसी के साथ ही आसपास के जिलों से भी गर्भवती महिलाओं को गंभीरावस्था में बीएचयू रेफर किया जाता है।
अगर गेट खुला रहेगा तब एंबुलेंस से किसी मरीज के आने पर वह एमसीएच विंग की बिल्डिंग के ठीक पहले तक पहुंच जाएगी, यहां से स्ट्रेचर के सहारे अंदर भी ले जाया जा सकेगा।
एमसीएच विंग जाने वाले मार्ग के गेट को क्यों बंद रखा गया है। इस बारे में चिकित्सा अधीक्षक से बातचीत की जाएगी। कोशिश की जाएगी कि एंबुलेंस के आने पर गर्भवती महिलाओं को विंग तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो। जिस गेट के पास गाड़ियां खड़ी हो रही हैं, उसको भी हटवाया जाएगा। - प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू
अस्पतालों की छोटी पर्ची पर लगेगी ओपीडी की मुहर
जिले के सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों द्वारा मरीजों को दवाओं के नाम की जो छोटी पर्ची दी जाती है, उस पर ओपीडी की मुहर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। अब तक इस तरह की व्यवस्था न होने से बाहर की दवा लिखने पर रोक लगाना मुश्किल होता था। चार दिन पहले हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में हुए इस फैसले को अमल में लाने की तैयारी में स्वास्थ्य विभाग जुट गया है।
सरकारी अस्पतालों में जब भी स्वास्थ्य मंत्री, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी का दौरा होता है तो मरीजों, तीमारदारों की ओर से बाहर की दवा लिखी पर्ची देने की शिकायत की जाती है। इसमें डॉक्टर का नाम और किस ओपीडी से पर्ची मिली, इसका जिक्र नहीं रहने से यह पता नहीं चल पाता था कि किस डॉक्टर ने दवा लिखी है। जहां एक ओर अधिकारी कार्रवाई करने की चेतावनी देते हैं, वहीं जन औषधि केंद्र जो खुले हैं, वहां पर्याप्त दवाइयां भी नहीं रहती हैं। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
24 अक्तूबर को सीडीओ की अध्यक्षता में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सीडीओ ने बाहर की दवा लिखने पर नाराजगी जताते हुए जन औषधि केंद्रों पर मानक के अनुसार सभी दवाएं रखने, डॉक्टरों को दवा की पर्ची पर मुहर लगाने के निर्देश दिया था।
अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सीएमओ डाॅ. संदीप चौधरी ने बताया कि इसकी शुरूआत सीएचसी से कर दी गई है। जल्द ही अस्पतालों में भी इसको लागू किया जाएगा। सीएचसी के अधीक्षक और संबंधित अस्पतालों के सीएमएस, एसआईसी पर इसका पालन करवाने की जिम्मेदारी रहेगी।