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स्यामल गात रोम भए ठाढ़े, नव राजीव नयन जल बाढ़े

Fri, 14 Oct 2016 02:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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रामनगर की रामलीला में आयोजित भरत मिलाप में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम।
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परे भूमि नहिं उठत उठाए/ बर करि कृपासिंधु उर लाए / स्यामल गात रोम भए ठाढ़े/ नव राजीव नयन जल बाढ़े/ भरतानुज लक्षिमन पुनि भेंटे/ दुसह बिरह संभव दुख मेटे...। प्रेम मिलन की बेला में गुरुवार की रात हजारों लीला प्रेमी भाव विह्वल हो उठे। भारत मिलाप की लीला देखने के लिए पारंपरकि वेश में लीला प्रेमियों का रेला उमड़ था।
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रामनगर में रामलीला का शुरुआत गुरुवार को नंदीग्राम में भरत की बांईं आंख फड़कने के साथ होती है। वह शकुन विचारते हैं। इस बीच हनुमान जी ब्राह्मण वेश में भरत के पास पहुंचते हैं। कहते हैं कि जिसके विरह में आप तड़प रहे हैं, वह राम, सीता, लक्ष्मण अयोध्या आ रहे हैं। समाचार सुनते ही भरत नंदीग्राम से अयोध्या जाते हैं। वहां राम का विमान देख स्त्रियां मंगलगान करती नजर आती हैं। राम वशिष्ट को देख उनके पैरों पर गिर पड़ते हैं। गुरु वशिष्ट राम को सीने से लगा लेते हैं। राम को देखने के लिए पूरी अयोध्या उमड़ पड़ती है। अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया था। राम घूम -घूम कर सभी से मिलते हैं। भरत जी राम के चरणों में गिर पड़ते हैं। राम भरत को उठाकर गले से लगा लेते हैं। यह दृश्य देख लीला प्रेमियों की आंखें भर आती हैं। भरत-शत्रुघ्न सीता के पैरों में गिर पड़ते हैं। फिर सभी अयोध्या पहुंचते हैं। कौशल्या आरती उतारती हैं। राम को सिंहासन पर बैठाने की तैयारी शुरू की जाती है। काशिराज ने हाथी पर सवार होकर लीला देखी।


कोरौता बाजार में गुरुवार को रावण वध की लीला हुई। विजय दशमी के उपलक्ष्य में रावण वध की लीला देखने के लिए सैकड़ों की तादाद में लोग उमड़ पड़े। राम -रावण के युद्ध के बाद लोगों ने बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को जलाया। इस दौरान जमकर आतिश बाजी हुई ।आतिशी नजारों से पूरा आसमान सतरंगी छटा से गुलजार हो गया था। रावण के पुतले के दहन के बाद आर्कषक लाग- विमान निकाले गए। ट्रालियों पर देवी-देवताओं के रूप में सजे बच्चों की झांकियों के लाग-विमान देखने के लिए भीड़ लगी रही। सुरही, बनकट, कोरौता,गोपालपुर, ऊंचगांव, तुलाचक, अलाउद्दीनपुर, बखरिया, परजनपुर, मंगलपुर, सभईपुर, अनंतपुर सहित कई गांवों से भीड़ रावण वध की लीला देखने पहुंची थी। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। राम लीला कमेटी के अध्यक्ष डब्बू सिंह ने इंतजामों की सराहना की।
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सूरज की मद्धिम किरणों की आभा के बीच गुरुवार की शाम चारों भाई गले मिले तो हर हर महादेव के गगनभेदी जयकारे गूंजने लगे। बैंडबाजा के साथ डमरू नाद होने लगा। गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा होने लगी। नाटी इमली के मैदान में प्राचीनतम मौनी बाबा रामलीला के भरत मिलाप का दृश्य ऐसा ही था। लीला की शुरुआत चित्रकूट से पुष्पक विमान पर सवार भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान के नाटी इमली पहुंचने से हुई। 3:40 बजे भगवान राम का पुष्पक विमान पहुंचा। इसी के साथ बैंडबाजा बजने लगा।


     हनुमान राम के अयोध्या पहुंचने की खबर लेकर नंदीग्राम पहुंचे। वहां उन्होंने भरत को बताया कि भगवान राम आ रहे हैं। भरत-शत्रुघ्न जतनबर स्थित अयोध्या से बाजेगाजे के साथ रथ पर सवार होकर निकले। नाटी इमली के मैदान में भरत मिलाप की लीला देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। शाम 4:45 पर पुष्पक विमान से उतर कर राम-लक्ष्मण दौड़े और मंच पर पड़े भरत-शत्रुघ्न को उठाकर गले लगा लिया। इस दौरान पुष्पवर्षा के बीच जयकारे गूंजते रहे। 
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