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...या हुसैन अलविदा की सदा संग ठंडे हुए ताजिये

Thu, 13 Oct 2016 02:11 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
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ताजिया के जुलूस में उमड़े अकीदतमंद।
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मोहर्रम की दसवीं तारीख यानी यौमे आशूरा पर बुधवार को हर ओर बस ‘...या हुसैन अलविदा’ की गूंज थी। आंखों में आंसू और दिल में इमाम हुसैन की शहादत का गम लेकर शहर के तमाम इलाकों से उठे ताजियों के जुलूस में लोगों की अकीदत देखते बनी। इमाम हुसैन को पुरसा देने के लिए किसी ने खंजर व कमा का मातम कर लहू का नजराना पेश किया तो कोई आंखों में आंसू लिए ...या हुसैन ...या हुसैन की सदाएं बुलंद करता चल रहा था। फातमान और सरैयां की ओर ताजियों संग हजारों लोगों की मौजूदगी करबला वालों की शहादत की दास्तां बयां करने को काफी थी। 
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बुधवार को मोहर्रम पर शहर के अलग अलग इलाकों से ताजियों का जुलूस उठाया गया। कई इलाकों से अलम, दुलदुल और ताबूत के जुलूस भी उठाए गए। एक से बढ़कर एक आलीशान ताजियों की जियारत करने को रास्ते भर अकीदतमंदों को हुजूम उमड़ा हुआ था। फन-ए-सिपहगिरी का करतब भी देख लोग दंग थे। पीछे पीछे ताजियों का जुलूस और आगे आगे तलवार, पटका और लाठियों का करतब दिखाते हुए नौजवान करबला की ओर से बढ़ रहे थे।

उधर, नई सड़क से तीन सौ साल पुराना कदीमी जुलूस दोपहर में उठाया गया। दालमंडी से जुलूस जब नई सड़क चौराहे पर पहुंचा तो बच्चे, बुजुर्ग, नौजवान सभी ने खंजर, कमा और जंजीर का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। देखने वालों की आंखें नम थीं तो उनका अकीदा और जज्बा देखकर हैरान। इस मातम ने करबला की याद को फिर से ताजा कर दिया। उधर अर्दली बाजार में अंजुमन इमामिया की ओर से उठे जुलूस में भी जबरदस्त खूनी मातम हुआ। ...या हुसैन, ...या हुसैन अलविदा की सदाओं के साथ सीनाजनी का मातम कर लहू का नजराना पेश किया। 
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मदनपुरा, गौरीगंज समेत लाट सरैया में भी खूनी मातम हुआ। करीब 26 अंजुमनों ने नौहाख्वानी, सीनाजनी और मातम में शिरकत की। अर्दली बाजार, कचहरी, नदेसर, चौक, दालमंडी, नई सड़क, हड़हा सराय, लल्लापुरा, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, बजरडीहा, शिवाला, मंडुवाडीह आदि क्षेत्रों के ताजिये फातमान दरगाह में ले जाकर ठंडे किए गए। वरुणा पार के ताजिये सदर इमामबाड़ा लाट पर दफन किए गए। लोहता से भी करीब पचास ताजियों का जुलूस निकला। यहां के ताजिये भट्टी गांव में ठंडे किए गए। कई जुलूस में ताजियों को हिंदू भाईयों ने पूरी अकीदत से कंधा दिया। जुलूस के रास्तों में कई हिंदू संगठनों की ओर से शरबत वगैरह के सबील भी लगाए गए थे। 
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