चार पहर सफाई के लिए सेवादारों की फौज के बावजूद रविवार को विश्वनाथ मंदिर का गर्भगृह कूड़े की ढ़ेर सरीखा पाया गया। यहां सैकड़ों फाइवर की टूटी हुई गिलासों और प्लास्टिक की लुटियों के ढेर लगे हुए मिले। वहीं अरघा में फूलमाला, बेलपत्र और जल भरे होने की वजह से बाबा का विग्रह भी नजर नहीं आ रहा था।
यह हाल तब पाया गया जब गर्भगृह और मंदिर परिसर की सफाई के लिए कुल 33 सेवादारों की तैनाती की गई है। न्यास परिषद की बैठक से एक दिन पहले रविवार की दोपहर यह खामियां गर्भगृह के औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी को मिलीं। उन्होंने बाबा के दरबार की इस दुर्गति पर कड़ी नाराजगी जताई। चेताया कि कर्मचारी रवैया बदलें, वरना इस तरह की अक्षम्य लापरवाही करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा।
न्यास परिषद के अध्यक्ष दोपहर दो बजे विश्वनाथ मंदिर पहु्ंचे। निरीक्षण के दौरान गर्भगृह की हालत देख न्यास अध्यक्ष ने जब वजह पूछी तब कार्यालय के काउंटर पर तैनात कर्मी सेवादारों को आवाज लगाने लगे लेकिन परिसर में कोई मौजूद नहीं था। न्यास अध्यक्ष ने गर्भगृह में हाल में ही लगाई गई 8.30 टन क्षमता का एसी भी देखा और पूछा कि इसकी जरूरत क्या थी। इससे मंदिर की दीवारों और शिखरों को नुकसान होने की उन्होंने आशंका भी जताई। न्यास अध्यक्ष ने कहा कि गर्भगृह कूड़ाघर नहीं है, इसकी मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
बाबा के अरघा में सिर्फ दो से ढाई इंच ही जल की मात्रा रहनी चाहिए, ऐसा निर्धारित किया गया है लेकिन निरीक्षण के दौरान अरघा जल से इस कदर भरा था कि बाबा नजर ही नहीं आ रहे थे। सोमवार को मंडलायुक्त सभागार में होने वाली न्यास की बैठक में गर्भगृह की बदइंतजामी का मामला उठने के आसार हैं।