फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गंगा महोत्सव: अंकित बत्रा की गायिकी और कबीर कैफे बैंड की धुन पर झूमे संगीत प्रेमी, शिव शंकर रखवाला...से माहौल हुआ भक्तिमय

Thu, 18 Nov 2021 11:39 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी में आयोजित गंगा महोत्सव की दूसरी निशा कथक, गायन और फ्यूजन के नाम रही। सूफी गायक अंकित बत्रा ने शिव कैलाश के वासी, शिव शंकर रखवाला सबका... सुनाया तो माहौल भक्तिमय हो गया। 
विज्ञापन
गंगा महोत्सव की दूसरी निशा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से वाराणसी के राजघाट पर आयोजित गंगा महोत्सव के दूसरे दिन कलाकारों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। घुंघरुओं की झंकार पर कथक, ध्रुपद गायिकी और कबीर के दोहे ने महोत्सव की दूसरी निशा में चार चांद लगा दिया। 

विज्ञापन


सूफी गायक अंकित बत्रा ने शिव कैलाश के वासी, शिव शंकर रखवाला सबका गीत गा कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। फिर अच्युतम केशवम कृष्ण माधवम, मेरा आप की कृपा से सब काम हो रहा है और श्याम तेरी बंशी से समापन किया। अंत में कबीर कैफे बैंड ने अपने फ्यूजन और कबीर वाणी की संयुक्त प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

चदरिया झीनी रे झीनी...
कबीर कैफे बैंड ने अपना शुरुआत चदरिया झीनी रे झीनी, फकीरा, दो दिन की जिंदगी, मन कर माया को अंधकार सॉन्ग की प्रस्तुति से पूरे माहौल में एक अलह ही फिज़ा घोल दिया। गायक नीरज आर्या के साथ वायलन पर मुकुंद, गिटार पर ब्रिटो, हारमोनियम पर पियूष, ड्रम पर वीरेन और ढोलक पर विक्रम ने जुगलबंदी की। 
विज्ञापन

पढ़ेंः मनोज तिवारी ने बांधा गायिकी का समां , 'रुद्राक्ष' में बहे फागुनी बहार, रिंकिया के पापा और दरभंगिया भऊजी पर झूमे श्रोता

विज्ञापन

गंगा तट पर बजा शिवशंकर का डमरू डमडम डम

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत कथक नृत्यांगना दिव्या गाबा और प्रवीण परिहार की जोड़ी ने शिव रुद्राष्टकम, ध्रुपद कंपोजिशन में शिव का विराट रूप, पारंपरिक कथक, ताल धमार पर आधारित पखावज एवं तबले की जुगलबंदी पर कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद मलिक बंधुओं में पंडित नवल किशोर मलिक और सह कलाकार निलेश एवं निकेश मलिक ने जुगलबंदी ने आयोजन में चार चांद लगा दिया।

मलिक बंधु ने राग अड़ाना सुरताल में पखावज पर शंभुहर रे, गंगाधर रे और उसके बाद तबले पर नृत्य देख नटराज राज का झमझम झमाके झम व अंत में शिव शंकर का डमरू बजदा डमडम डम डमाक डम गीत से अपने प्रस्तुति का समापन किया।
पखावज पर राजीव रंजन पांडेय, तानपुरा पर आरती मलिक, तबले पर देवेश तिवारी ने संगत की। कार्यक्रम के दौरान राजघाट की सीढियों पर बैठे श्रोता खुद को झुमने से रोक नहीं पाए। 
तस्वीरों में देखें: देव दीपावली पर देवलोक सी सजी काशी, रंगबिरंगी रोशनी से घाटों पर बना बेहद सुंदर नजारा
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें