इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत कथक नृत्यांगना दिव्या गाबा और प्रवीण परिहार की जोड़ी ने शिव रुद्राष्टकम, ध्रुपद कंपोजिशन में शिव का विराट रूप, पारंपरिक कथक, ताल धमार पर आधारित पखावज एवं तबले की जुगलबंदी पर कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद मलिक बंधुओं में पंडित नवल किशोर मलिक और सह कलाकार निलेश एवं निकेश मलिक ने जुगलबंदी ने आयोजन में चार चांद लगा दिया।
मलिक बंधु ने राग अड़ाना सुरताल में पखावज पर शंभुहर रे, गंगाधर रे और उसके बाद तबले पर नृत्य देख नटराज राज का झमझम झमाके झम व अंत में शिव शंकर का डमरू बजदा डमडम डम डमाक डम गीत से अपने प्रस्तुति का समापन किया।
पखावज पर राजीव रंजन पांडेय, तानपुरा पर आरती मलिक, तबले पर देवेश तिवारी ने संगत की। कार्यक्रम के दौरान राजघाट की सीढियों पर बैठे श्रोता खुद को झुमने से रोक नहीं पाए।
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