Varanasi News: नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट संस्थान के निदेशक ने कमिश्नर कौशल राज शर्मा के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर वार्ता की। बताया गया कि सिर्फ काशी विश्वनाथ से ही रोजाना करीब छह टन और छोटे बड़े सभी मंदिरों को मिलाकर रोजाना करीब सौ टन फूल इकठ्ठा होते हैं।
बाबा विश्वनाथ मंदिर सहित शहर के तमाम मंदिरों से निकलने वाले फूलों से अब हर्बल गुलाल, सिंदूर और अगरबत्ती बनाई जाएगी। नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) की टीम इसमें सहयोग करेगी। इसके लिए शनिवार को एनबीआरआई की टीम काशी पहुंच रही है। इस संबंध में संस्थान के निदेशक ने कमिश्नर कौशल राज शर्मा के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर वार्ता की।
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कमिश्नर ने बताया कि एनबीआरआई के निदेशक शनिवार को टीम के साथ काशी पहुंचेंगे। यहां बाबा विश्वनाथ मंदिर के अलावा आसपास के अन्य मंदिरों को देखेंगे। बताया कि सिर्फ काशी विश्वनाथ से ही रोजाना करीब छह टन और छोटे बड़े सभी मंदिरों को मिलाकर रोजाना करीब सौ टन फूल इकठ्ठा होते हैं।
इनसे एनबीआरआई की टीम अगरबत्ती, हर्बल गुलाल, खाद और लिक्विड सिंदूर तैयार करेगी। गंगा में फेंके गए निर्माल्य का भी प्रयोग खाद बनाने में किया जाएगा। कमिश्नर कौशल राज शर्मा ने बताया कि इस बार होली पर बाबा विश्वनाथ को जो गुलाल लगाया गया था, उसे फूलों की मदद से एनबीआरआई की टीम ने ही तैयार किया था।