मिर्जापुर के आवास विकास कॉलोनी स्थित पार्क में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मूर्ति तोड़ने वाले चार आरोपियों को मिर्जापुर रेलवे स्टेशन के बाहर से बुधवार की सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मूर्ति तोड़ने के लिए प्रयोग की गई ईंट को भी बरामद कर लिया है।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि एक दूसरे की ताकत आजमाने में मूर्ति टूट गई थी। मूर्ति तोड़ने के पीछे उनका कोई उदेश्य नहीं था। चारों का किसी राजनीति दल से कोई संबंध नहीं है। केवल मनबढ़ होने के चलते ऐसा कार्य किया है। सभी के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
ये बातें डीआईजी रतन कुमार श्रीवास्तव ने पुलिस लाइन में घटना का खुलासा करते हुए बुधवार को बताया। उन्होंने बताया कि आवास विकास कालोनी स्थित पार्क में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मूर्ति अज्ञात लोगों ने तीन जून की रात तोड़ दिया था। घटना के बाद कांग्रेसजनों ने धरना प्रदर्शन कर आरोपियों को गिरफ्तार कर नई मूर्ति लगाने की मांग की थी।
पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी थी। बुधवार को सूचना मिली कि मूर्ति तोड़ने वाले आरोपी मिर्जापुर रेलवे स्टेशन से कहीं भागने वाले हैं। पुलिस वहां पहुंची और चार आरोपियों को दबोच लिया जबकि एक फरार हो गया।
पकड़ा गया आरोपी अजय कुमार द्विवेदी निवासी जेपी पुरम, अपने साथी संदीप तिवारी , शिवम शर्मा , राहुल गौतम निवासी आवास विकास कालोनी, विपिन पांडेय निवासी कतवारू का पुरा कटरा कोतवाली के साथ तीन जून की रात लगभग साढ़े दस बजे पार्क में पहुंचे।
वहां अजय ने कहा कि किसके पास कितनी ताकत है इसको सिद्घ करके दिखाए। इस पर संदीप ने कहा कि राजीव गांधी की मूर्ति को जो पत्थर से एक बार में तोड़ देगा वही सबसे ताकतवर माना जाएगा। अजय ने ईट उठा कर मूर्ति पर मार दिया लेकिन मूर्ति नहीं टूटी।
इसके बाद संदीप तिवारी ने दूसरा पत्थर उठा कर मारा तो मूर्ति टूट गई। मूर्ति टूटते ही सभी उसके टूटे हिस्से को नाले में फेंक कर घर चले गए। सुबह बवाल मचने पर सभी घबरा गए और रोडवेज स्थित एक चाय की दूकान पर मिले। जहां सभी ने इसके बारे में किसी को कुछ भी नहीं बताने को कहा।
हालांकि अपने परिजनों को इसके बारे में बता दिया था। मामला शांत नहीं होने पर सभी भागने की फिराक में जुट गए। इसी बीच पुलिस ने सर्विलांस की मदद से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जबकि विपिन पांडेय अभी फरार चल रहा है। जिसे जल्द की गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 48 घंटों में घटना खुलासा करने पर पुलिस टीम को डीआईजी ने 12 हजार तथा एसपी आशीष तिवारी ने पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की।