गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के नीचे आ गया है, लेकिन ढेलवरिया के प्राथमिक विद्यालय, बड़ादेव मंदिर, नवयुग विद्यामंदिर और बड़ी बाजार के बाढ़ राहत शिविरों में रह रहे दर्जनों पीड़ित परिवारों को राहत नहीं मिली है। मंगलवार को पीड़ितों ने बताया कि अभी हमारे मकान में कीचड़ और पानी भरा है। ऐसे में वहां रहना बेहद मुश्किल है। इधर, प्रशासन से शिविर में मिलने वाली सेवाएं भी बंद कर लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। जिनके सामने खाने पीने की समस्या खड़ी हो गई है।
छह अगस्त से शिविरों में रह रहे कई लोग अपने घर लौट गए, लेकिन वरुणा के तटीय इलाके में रहने वाले कई बाढ़ पीड़ित हैं, जिनका घर अब भी पानी और कीचड़ की चपेट में है। इधर, अस्सी इलाके के सभी शिविर सोमवार को ही खाली हो गए।
राहत शिविर बंद, नमकीन बिस्किट खाकर कर रहे है गुजारा
सारनाथ। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए के सलाहपुर में प्राइमरी स्कूल में बना राहत शिविर सोमवार से राजस्व टीम ने बंद करा दिया। वरुणा किनारे कुछ लोग अपने मकानों में चले गए, लेकिन अभी भी 40 लोग शिविर में रह रहे हैं। हीरालाल, कन्हैया, रेखा, दुर्गा, गुड़िया, बेबी, राधा, शीला ने बताया कि पानी तो कम हुआ है लेकिन अभी भी हम लोग का मकान पानी के अंदर समाया हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा एक बार कच्चा राशन दिया गया था उसके बाद कोई झांकने तक नहीं आया। कुछ समाजसेवी शिविर में लाई, बिस्कुट, नमकीन वितरण किए थे जिसे खाकर गुजारा कर रहे हैं।