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यह है हालः 2030 की कर रहे तैयारी, अभी से फुंकने लगे ट्रांसफॉर्मर, महीने भर के अंदर 5 हो गए खराब

Sun, 17 Mar 2024 07:06 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

Varanasi News: ऊर्जा मंत्रालय ने वाराणसी जिले में 15 नए बिजली घर बनाने के लिए स्वीकृति दी है। इनमें हरहुआ के सरसवा, करखियांव, पिंडरा के बसनी, राजातालाब ग्रामीण, रोहनिया के पहाड़ी, जाल्हूपुर, लेढ़ूपुर के शंकरपुर, चोलापुर के नियारडीह, चौक के संदहा, एमआईएस के सालारपुरा, दशाश्वमेध, पीएसी भुल्लनपुर, लमही, जेल रोड और लेढ़ूपुर में 10 से लेकर 20 एमवीए तक क्षमता के विद्युत उपकेंद्र बनाएगा।
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प्रेसवार्ता में जानकारी देते एमडी शंभू कुमार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्वांचल डिस्कॉम ने वर्ष 2030 के अनुमानित लोड को लक्ष्य मानकर वाराणसी जिले के बिजली घरों की क्षमता बढ़ाई है। उदयपुर, गंजारी, देवदासपुर, रौनाकला, भेलूपुर, संकुलधारा, काशीपुर, नगवा, डाफी, अर्दली बाजार, सांस्कृतिक संकुल समेत 27 बिजली घरों में पॉवर ट्रांसफॉर्मर की संख्या बढ़ाकर क्षमता वृद्धि की गई है। हालांकि गर्मी में बढ़ते ही ट्रांसफॉर्मर फुंकने लगे हैं। पिछले एक महीने के अंदर पांच स्थानों पर अलग-अलग क्षमता के ट्रांसफॉर्मर फुंक गए।

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लहुराबीर, बेनिया नई सड़क, मछोदरी डिवीजन के विशेश्वरगंज और आदमपुर में ट्रांसफॉर्मर जले, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। पूर्वांचल डिस्कॉम के तकनीकी निदेशक जितेंद्र नलवाया ने कहा कि ऐसे ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाकर लोड कम करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।

बनारस में 15 नए बिजली घर बनेंगे
बिजली निगम वाराणसी जिले में 15 नए बिजली घर बनाने जा रहा है। इसके अलावा एक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ई हाउस और पांच जीआईएस सिस्टम आधारित विद्युत उपकेंद्र बनेंगे।
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ऊर्जा मंत्रालय ने वाराणसी जिले में 15 नए बिजली घर बनाने के लिए स्वीकृति दी है। इनमें हरहुआ के सरसवा, करखियांव, पिंडरा के बसनी, राजातालाब ग्रामीण, रोहनिया के पहाड़ी, जाल्हूपुर, लेढ़ूपुर के शंकरपुर, चोलापुर के नियारडीह, चौक के संदहा, एमआईएस के सालारपुरा, दशाश्वमेध, पीएसी भुल्लनपुर, लमही, जेल रोड और लेढ़ूपुर में 10 से लेकर 20 एमवीए तक क्षमता के विद्युत उपकेंद्र बनाएगा।

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नगर निगम में ई-हाउस बिजली घर

बिजली निगम नगर निगम के पावर हाउस को ई-हाउस प्रणाली पर शिफ्ट करेगा। इसमें जगह बचाने के लिए पावर ट्रांसफॉर्मर को बाहर छोड़कर समूचे बिजली सिस्टम को एक कंटेनर में लगा दिया जाता है। हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम से उसकी निगरानी होती है। इसके अलावा गोदौलिया, बेनियाबाग, भदैनी, विद्यापीठ और मैदागिन में जीआईएस (गैस इंसुलेटेड स्विचगियर) सिस्टम आधारित विद्युत उपकेंद्र बनेंगे। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एमडी शंभू कुमार ने कहा कि इसके लिए काम शुरू हो गया है।

1040 करोड़ से विश्वस्तरीय बनेगी काशी की बिजली व्यवस्था
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक शंभू कुमार ने कहा कि वाराणसी शहर की बिजली व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 1040 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। शहर की बिजली व्यवस्था स्वचालित यंत्रों से लैस स्काडा सिस्टम से संचालित की जाएगी। वह शनिवार को पूर्वांचल डिस्कॉम में पत्रकार वार्ता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि शहर में काम होने के बाद बिजली आपूर्ति में न्यूनतम ट्रिपिंग और व्यवधान होगा। उन्होंने कहा कि 312 करोड़ रुपये खर्च कर स्मार्ट शहर में स्मार्ट डिस्ट्रीब्यूशन प्रणाली की स्थापना की जाएगी। 50 बिजली घरों को स्काडा सिस्टम से संचालित किया जाएगा। 11 केवी के ओवरहेड फीडरों की निगरानी ड्रोन से होगी। फीडरों को इस प्रकार जोड़ा जाएगा कि फॉल्ट आने पर उसे अलग कर उपभोक्ताओं को दूसरे फीडर से आपूर्ति की जा सके। नगर के व्यस्त चौराहों पर केबल भूमिगत करने, सड़कों से ट्रांसफॉर्मर और बांस-बल्ली हटाने के लिए 513.58 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है।
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