अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर अपार्टमेंट के चौथे मंजिल पर लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
आग में सब कुछ तबाह हो गया। 10 वर्षों की गाढ़ी कमाई से तैयार आशियाने में सिर्फ और सिर्फ काली दीवारें बची हैं। चार घंटे में घर-गृहस्थी के सामान यहां तक कपड़े, नकदी, आभूषण आदि सबकुछ जल गए। बच्चों की किताबें, राशन कुछ भी नहीं बचा। रोते-बिलखते हुए बच्चों और अन्य परिवारों के साथ पूरी रात खुले आसमान के नीचे कटी।
यह दर्द अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर अपार्टमेंट के बी-ब्लॉक के 401 फ्लैट की मालकिन पीड़िता मीना गुप्ता का रहा। आवासीय परिसर में फायर सेफ्टी के इंतजाम होते तो आज इतना बड़ा हादसा नहीं होता। बिल्डर की लापरवाही ने हमे एक तरह से बेघर कर दिया।
चंदौली के चहनिया में सीडीपीओ के पद पर तैनात मीना गुप्ता ने बताया कि गुरुवार शाम सात बजे पूजा पाठ करके बच्चे को कपड़ा दिलाने के लिए मलदहिया गई थी। इतने में सूचना मिली कि फ्लैट में आग लगी है। अपार्टमेंट पहुंची तो मेरा आशियाना दहक रहा था।
पति राकेश कुमार गुप्ता आग बुझाने में चोटिल हो गए। हाथ में चोटें आई। आग लपटें ऐसी थीं कि घर से हम कुछ भी नहीं निकाल पाए। साथ ही 1001 तक के फ्लैट में धुआं भर गया। सभी लोगों के सामान नष्ट हुए। बी-ब्लॉक के 44 फ्लैट के परिवारों के सदस्य लगभग 80 से अधिक लोग आवासीय परिसर के पार्क और दूसरे ब्लॉक की पार्किंग में पूरी रात जगते रहे।
दूसरे दिन तक फ्लैट आग से तपता रहा। मीना गुप्ता के अनुसार बालकनी में झूले पर रजाई रखी थी, आग उसी के जरिये फैली। आग की लपट से ही चार एसी और फ्रीज का कंप्रेशर फटा। दो सिलिंडर में ब्लास्ट हुआ।
अग्निशमन अधिकारी से बातचीत करते फ्लैट के लोग
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मीना गुप्ता का आरोप रहा कि बिल्डिंग में आग बुझाने के कोई उपकरण नहीं थे, समय रहते यदि उपकरण होते थे तो आज इतना बड़ा हादसा नहीं होता। बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर आग बुझाने के पाइप की लंबाई मात्र प्रथम तल तक ही थी। बी-ब्लाक में रहने वाले अमित तुलस्यान और राकेश गुप्ता ने बताया कि बिल्डिंग में लगे फायर सिस्टम को चलाने में हाथ चोटिल हुआ।
अग्निशमन और पुलिस अधिकारियों ने की पूछताछ
घटना के बाद दूसरे दिन शुक्रवार को घटनास्थल पर अग्निशमन अधिकारियों, जिला प्रशासन और कमिश्नरेट पुलिस के अफसर पहुंचे। पीड़ितों से बातचीत की। इस दौरान बिल्डर आरसी जैन भी लोगों के बीच पहुंचे।
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