सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के पुस्तकालय भवन में अधिवक्ताओं को संबोधित करते न्यायमूर्ति अ?
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मऊ। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति और जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति अली जामिन ने कहा कि पीड़ित को न्याय मिले, बार और बेंच दोनों का मकसद एक है। जब दोनों का मकसद एक है, कार्य एक है, तो इसमें कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। न्यायिक कार्य में कुछ दिक्कतें होती हैं, मैने महसूस किया है। जिस तरह हमें संवेदनशील होना चाहिए नहीं होते, कहीं न कहीं कुछ कमियां रह जाती हैं। वे सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के पुस्तकालय भवन में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि न्यायालय के निरीक्षण के दौरान भादवि की धारा 498 ए की फाइलें देखीं जो 20-21 वर्षों से लंबित हैं, वर्ष 1999 की फाइलें लंबित हैं, आर्डरशीट से ऐसा प्रतीत होता है कि पत्रावली डंप पड़ी है। कहीं न कहीं हमारे पर्यवेक्षण में कमियां हैं, जिससे फाइलें इतने वर्षों से लंबित हैं। कहा कि न्यायाधीश और अधिवक्ताओं के बीच संवाद होना चाहिए, तभी समस्या का समाधान हो सकता है। अधिवक्ताओं की जो भी समस्याएं है, उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा। कहा कि जिला जज के रूप में मऊ जनपद में मेरी पहली नियुक्ति हुई थी, यहां जो प्यार व स्नेह मिला उसे भुला नहीं सकता।
कार्यक्रम में जिला जज रामेश्वर और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उन्हें अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान बार के पदाधिकारियों के अलावा, लालजी पांडेय, फतेहबहादुर सिंह, भरत राय, इश्तियाक अहमद, अमरनाथ सिंह, मनोज कुमार पांडेय, सदानंद राय, राजेश राय, अरविंद सिंह, हरिद्वार राय, शमशुल हसन, प्रमोद श्रीवास्तव, हुमा रिजवी आदि उपस्थित रहे।