गंगा के तटवर्ती इलाकों में लोग दहशत में
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गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के कारण असि और वरुणा में पलट प्रवाह की स्थिति है। गंगा के तटवर्ती इलाकों में लोग दहशत में हैं। पानी से घिर चुके इन मकानों में रहने वालों ने ऊंची बस्तियों में किराए पर कमरा लेकर अपना सामान वहां पहुंचाना शुरू कर दिया है।
शक्कर तालाब के चंद्रशेखर ने बताया कि उनके घर में पानी घुस गया है और वह अब ऊंची जगह पर किराए पर कमरा लेकर रहेंगे। नक्खीघाट की शारदा ने बताया कि बीती रात ही उनके मकान के निचले हिस्से में पानी घुस गया। पहला तल्ला पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। अब पूरा परिवार दूसरे तल पर रह रहा है।
वरुणा किनारे बसी बस्तियां कोनिया, दीनदयालपुर, नक्खीघाट, पुलकोहना में दो सौ से अधिक मकान पानी से घिर चुके हैं। शुक्रवार की सुबह से लोगों अपने जरूरी सामानों के साथ पलायन कर रहे थे। तिनपुलवा के नीचे से होते हुए वरुणा में गिरने वाले नाले के दोनों ओर बने अधिकतर मकानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। मुन्नी, अरशद, वकील, इरफान, मो. मुश्ताक, असलम, प्रमोद, अनिल, कमलेश, असलम दर्जी, रमजान, इरफान, बाबू ने अपना घर छोड़कर दूसरी जगह शरण ली है।
छत से लेकर गलियों तक हो रहा शवदाह
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गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह के लिए मुसीबतें भी बढ़ गई हैं। मणिकर्णिका घाट पर जहां छत पर शवदाह हो रहा है, वहीं हरिश्चंद्र घाट के ऊपर गलियों में शवदाह शुरू हो चुका है। गंगा की सभी घाटों का संपर्क पूरी तरह से समाप्त हो गया है। ऐसे में हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका दोनों ही घाटों पर लोगों को शवदाह करने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर से सामने घाट इलाके में रहने वाले लोगों को भी अब डर सताने लगा है। जलस्तर में अगर चार से पांच फुट की और बढ़ोत्तरी हुई तो क्षेत्र की मारुति नगर कॉलोनी और गायत्री नगर कॉलोनी के डेढ़ सौ से अधिक मकानों तक बाढ़ का पानी पहुंच जाएगा। कॉलोनियों में रहने वालों की मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी। जलस्तर बढ़ने से नगवा नाले का पानी भी उल्टा बहने लगा है। कुछ कालोनियाें में सीवर ओवरफ्लो करने लगा है।
वरुणा किनारे की बस्तियों में रहने वालों को अब बाढ़ का खतरा सताने लगा है। उनका कहना है कि 2013 में आधी रात में बाढ़ का पानी अचानक उनके घरों में घुस गया था। अचानक पानी घुसने से घर-गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया था। बस्तियों में रहने वालों को पता ही नहीं है कि क्षेत्र में कहीं बाढ़ राहत चौकी उनके लिए बनाई गई है या नहीं।