25 से अधिक क्रॉस कंट्री रेस का इनाम भी उनके नाम है। डेढ़ बीघा की खेती और मैराथन की प्राइज मनी ही उनकी आजीविका का साधन है। सभाजीत के मुताबिक साल में करीब डेढ़ से दो लाख रुपये तक वह मैराथन जीतकर कमा लेते हैं। इसी माह 29 को दिल्ली में एयरटेल हाफ मैराथन होने जा रहा है। इसकी तैयारी में वह जुट हुए हैं। इसके बाद मुंबई में होने वाली स्पर्धा पर भी ध्यान रहेगा।
खेत में ही रोज लगाते हैं दौड़
65 की उम्र में भी सभाजीत यादव थके नहीं है। उनका कहना है कि कम से कम अगले दस वर्ष तक वह मैराथन दौड़ना चाहते हैं। इसके लिए वह रोजाना करीब 10 से 15 किमी की दौड़ लगाते हैं। खेत में ही दो सौ मीटर का ट्रैक तैयार किया है। इसी पर उनका अभ्यास चलता रहता है। अभ्यास के बाद वह खेती करते हैं और फिर जरुरी काम निपटाकर अभ्यास में जुट जाते हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने से उन्हें फिट रहने में भी मदद मिलती है।
सभाजीत का कहना है कि वह देश के लिए दौड़ना चाहते हैं। भारतीय तिरंगा लेकर विदेशी धरती पर दौड़ना उनका सपना है, मगर आर्थिक स्थिति के कारण यह साकार नहीं हो पाया है। अब जल्द ही पैसे इकट्ठे कर वह पासपोर्ट बनवाएंगे।
पिता की राह पर बेटे, एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी
सभाजीत के तीन पुत्र है राहुल(22), रोहित(20) और रोहन(15)। तीनों बेटे भी पिता की राह पर चलकर खेलों में ही हुनर दिखा रहे हैं। कम संसाधन के बाद भी सभाजीत यादव ने उन्हें भाला फेंकना सिखाया है। बड़ा बेटा राहुल नेशनल स्तर जेवलिन थ्रो का खिलाड़ी रहा है। दूसरा बेटा रोहित वर्ल्ड स्कूल गेम-2016 में गोल्ड, एशियन यूथ चैंपियनशिप-2017 में सिल्वर, यूरासिन एथलेटिक्स मीट-2019 में गोल्ड सहित कई मेडल जीत चुका है।
ओलंपिक की तैयारी में जुटा रोहित एनआईएस पटियाला में अभ्यास कर रहा है। सबसे छोटा रोहन हाईस्कूल में पढ़ाई के साथ भाला फेंक में ही अभ्यास कर रहा है।