उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से फर्जी बोर्ड चलाने के आरोप में लखनऊ के इंदिरानगर से गिरफ्तार आरोपियों की किस्मत किस्मत देखते ही देखते पलटी थी। गिरफ्तार सात में से तीन फर्जी बोर्ड संचालक आजमगढ़ निवासी हैं।
आजमगढ़ के राजमन गौड़ और जितेंद्र गौड़ पुत्र कैलाश गौड़ तथा राधेश्याम प्रजापति पुत्र पारस की किस्मत अचानक से बदल गई थी। आरोपियों ने अपने फर्जी बोर्ड से 62 शिक्षण संस्थाओं को जोड़ा था और आठ राज्यों में अपने स्टडी सेंटर भी बनाए थे, जिनके जरिए इन्होंने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है।
लक्जरी गाड़ियां, गनर आदि के साथ इनकी शानशौकत देखकर गांववासी भी हैरान थे। गिरफ्तारी की खबर पहुंचने के बाद लोगों को पता चला कि इन्होंने फर्जी बोर्ड खोलकर करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है।
बता दें कि ये ठग हाईस्कूल और इंटर के 4000 से ज्यादा छात्रों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर उन्हें अंकपत्र व प्रमाणपत्र देते हुए रुपया वसूलते थे। इन्होंने www.upsosb.ac.in, www.upsos.co.in और www.upsos.in के नाम से तीन वेबसाइट बना रखी थीं। उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और झारखंड में फर्जी बोर्ड के हजारों स्टडी सेंटर खोलकर ठगी का धंधा किया जा रहा था।
ठगी के इस धंधे का खुलासा रविवार को हुआ था। अब जांच के बाद एक के बाद एक कई सच्चाई सामने आ रही है। उधर, कैलाश गौड़ ने अपने दोनों पुत्रों को निधि फाइनेंस नामक कंपनी चलाने का दावा किया है।
बरदह थाना क्षेत्र के रवनिया निवासी कैलाश गौड़ के तीन पुत्र हैं। इनमें से दो राजमन और जितेंद्र गौड़ को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। इनका एक भाई शैलेंद्र गौड़ मुंबई में काम करता है।
कैलाश गौड़ ने बताया कि पहले ये भी मुंबई में रहते थे। चार साल पूर्व वहां की जमीन बेचकर जौनपुर के गौरा बादशाहपुर थाना के बारी रोड पर जेबीएस नाम का प्राइमरी स्तर का विद्यालय खोला था। उसी में पॉलीटेक्निक भी चला रहे थे पर मान्यता नहीं होने से विद्यालय बंद कर दिया। सामान, वाहन बेचकर घर बनवाया है।