संस्कृति कर्मी राजेश गुप्ता का कहना है कि बनारस में बहुत बड़ी संख्या में लोग रोजाना पान खाते हैं और यह हमारी धार्मिक संस्कृति का एक हिस्सा है। पान, सिर्फ एक व्यंजन से कहीं बढ़कर है। यह एक सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीक है। बीएचयू के वैद्य सुशील दुबे का कहना है कि पान औषधीय गुणों से भरपूर होता है।
आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि ने भी पान की खूबियों का वर्णन किया है। उन्होंने लिखा है पान खाने से पाचन शक्ति दुरुस्त होती है। सुश्रुत का मानना है कि पान गले को साफ रखता है और इसके सेवन से मुंह से दुर्गंध नहीं आती है। इसके अलावा कई अन्य बीमारियों में भी इसका इस्तेमाल होता है।