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पांच साल से कम उम्र के बच्चों और 50 साल से अधिक उम्र वालों में मिल रही यह बीमारी
माई सिटी रिपोर्टर/रबीश श्रीवास्तव
वाराणसी। पलकों में गांठ या सूजन हो रहा है। ऑपरेशन के बाद बार-बार घाव बन रहा है और भर नहीं रहा तो जरा सी असावधानी बड़ा खतरा बन सकती है। यह पलकों के कैंसर के लक्षण हैं। डॉक्टरों के अनुसार पलकों का कैंसर जानलेवा हो सकता है। इसके इलाज में देरी की वजह से शरीर के अन्य भाग में फैलने का खतरा अधिक रहता है।
बीएचयू क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में ऐसे चार से छह मरीज हर महीने मिल रहे हैं। कैंसर, चोट एवं आकुलोप्लास्टिक सर्जन और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र प्रकाश मौर्या के निर्देशन में एक टीम अस्पताल में आंखों के कैंसर के मरीजों का इलाज करने के साथ ही अलग-अलग कारणों का अध्ययन करने में जुटी है। बीएचयू क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में हर शुक्रवार को डॉ. मौर्य की ओपीडी और बुधवार को प्रथम तल पर चलने वाली विशेष आकुलोप्लास्टिक क्लीनिक को मिलाकर सात-आठ मरीज पलक के कैंसर के लक्षण वाले आते हैं। इनकी जांच कराने के बाद सप्ताह में करीब एक-दो मरीज और महीने में करीब 5 से 6 मरीजों में पलकों के कैंसर की पुष्टि होती है।
इसमें बच्चों की संख्या कम, लेकिन 50 साल से अधिक उम्र वाले मरीजों की संख्या थोड़ी ज्यादा रहती है। डॉ. मौर्या का कहना है कि पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों में आंख के परदे का रेटिनोब्लास्टोमा नामक जानलेवा कैंसर होता है। आंख के किसी भी भाग में ट्यूमर और कैंसर हो सकता है। बेनाइन नेत्र ट्यूमर जो कि धीरे-धीरे बढ़ता है और जानलेवा नहीं होता है। इसमें आगे चलकर आंख की नसों, नेत्र गोलक पर दबाव पड़ने से रोशनी कम होने का खतरा रहता है, जबकि मेलिगनेंट नेत्र ट्यूमर यह आंखों के साथ ही शरीर के अन्य भागों (लीवर, किडनी, हृदय, प्रोस्टेट आदि) में खून के माध्यम से फैलता है। इसमें देरी जानलेवा हो सकती है। इसके अलावा कैंसर पलक से गले की गिल्टियों में भी फैल सकता है। बीएचयू में इसके लक्षण वाले मरीज की जांच करने के साथ ही पुष्टि होने के बाद ऑपरेशन, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी आदि की व्यवस्था है।
हर बुधवार को विशेष क्लीनिक
क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में हर बुधवार को साप्ताहिक विशेष नेत्र कैंसर एवं आकुलोप्लास्टिक क्लीनिक चलती है। इसमें आंखों में होने वाले ट्यूमर/कैंसर के मरीज आते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक पिछले दस साल साल में कुल 863 मरीज ट्यूमर के आए, इसमें सबसे ज्यादा 422 मेलिगनेंट ट्यूमर यानी खतरनाक नेत्र कैंसर के आए। इसमें 28 प्रतिशत पलक के कैंसर, 19 प्रतिशत रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर, 17 प्रतिशत आंख की सफेद झिल्ली के कैंसर, 8 प्रतिशत नेत्र गुहा और 10 प्रतिशत नाक, साइनस से आंख में पहुंचने वाले कैंसर के मरीज आए।
ये हैं लक्षण
पलकों के अंदर गांठ का बढ़ना, सूजन, घाव होना।
पलक के गांठ या बिलनी के ऑपरेशन के बाद फिर से गांठ बनना।
पलकों का गलत दिशा में मुड़ जाना या आंख की बरौनी का नष्ट हो जाना।
पलकों के कैंसर के कारण
धूप में ज्यादा देर तक रहने पर सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क से कोशिकाओं में म्यूटेशन होना।
प्रदूषण, धुएं में मौजूद आर्सेनिक, बेंजीन नामक जहरीले रसायन के प्रभाव से म्यूटेशन होना।
विषाणुओं के संक्रमण के कारण भी नेत्र कैंसर की संभावना रहती है।
इन सुझावों पर अमल करना जरूरी
मरीज प्रारंभिक अवस्था में अगर डॉक्टर के पास चला जाए और इलाज हो तो राहत हो सकती है।
पलकों पर बार-बार बिलनी हो तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
कैंसर के उपचार को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए।
नेत्र कैंसर के इलाज के बाद नियमित अंतराल पर कैंसर विशेषज्ञ को दिखाते रहना चाहिए।