जिला जज की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह उचित प्रतीत होता है कि एएसआई के सर्वे के दौरान ज्ञानवापी से जो भी सामग्री मिले, जो कि इस मुकदमे के तथ्यों से संबंधित हो या हिंदू धर्म व पूजा पद्धति से संबंधित हो या ऐतिहासिक व पुरातात्विक दृष्टिकोण से मुकदमे के निस्तारण के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, उन सभी को जिलाधिकारी या उनके द्वारा नामित अधिकारी को सौंप कर सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही जिला जज की अदालत ने मां शृंगार गौरी मुकदमे की चार अन्य वादिनी के प्रार्थना पत्र और अन्य लंबित प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तिथि नियत कर दी।
अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने कहा कि अपने आवेदन में राखी सिंह ने ज्ञानवापी में नमाजियों की संख्या सीमित अथवा विनियमित करने और वहां अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को रंगाई-पुताई कराने से रोकने की भी प्रार्थना की थी। मगर, उक्त दोनों बिंदुओं पर अदालत ने अपने आदेश में कोई टिप्पणी नहीं की।