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Varanasi News: लोलार्कदित्य से आरंभ हुई काशी की द्वादश आदित्य यात्रा, श्रद्धालु बोले- हर हर महादेव

Mon, 26 Aug 2024 10:27 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: भगवान् सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं और वेदों में सूर्यको चराचर जगत की आत्मा कहा गया है। गीता में भगवान ने स्वयं को ज्योतियों में श्रेष्ठ किरणों वाला सूर्य कहा है। वेदवेत्ताओं के अनुसार ज्योतिर्मय सूर्य में 55 रुद्रों की व्याप्ति होने से वे साक्षात् रुद्रलिंग अर्थात् ज्योतिर्लिंग रूप ही हैं।
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यात्रा के दौरान जुटे भक्तगण। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रविवारे रवेर्यात्रा वारविसंयुजि, तथैव रविसप्तम्यां सर्वविघ्नोपशांतये...अर्थात समस्त विघ्नों के शमन के लिए भगवान सूर्य की तीर्थयात्रा रविवार युक्त सप्तमी को करनी चाहिए। आनंदकानन काशी ढूंढे परिवार और काशीवासी रविवार को काशी की पौराणिक द्वादश आदित्य की। 40 श्रद्धालुओं ने यात्रा की शुरूआत भदैनी स्थित लोलार्कदित्य से आरंभ की।

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यात्रा के दूसरे पड़ाव जंगमबाड़ी में विमलादित्य, सूरजकुंड पर सांबादित्य, बर्करीकुंड पर उत्तरार्क, आदिकेशव मंदिर में केशवादित्य, कामेश्वर महादेव में खखोल्कादित्य, त्रिलोचन महादेव मंदिर में अरुणादित्य, मां मंगला गौरी मंदिर में मयूखादित्य, संकटा घाट की सीढ़ी पर यमादित्य, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में द्रौपदादित्य, मीरघाट पर वृद्धादित्य और ललिताघाट पर गंगादित्य का दर्शन करने के साथ ही यात्रा पूर्ण हुई। 

उल्लेखनीय है कि शास्त्रों में आदित्य के 12 रूप बताये गये हैं तथा ज्योतिर्लिंग भी 12 ही हैं। समस्त प्रकार के रोगों की निवृत्ति के लिए सूर्यकी उपासना की जाती है। कुष्ठ आदि समस्त चर्मरोगों के शमन और धन-धान्य की वृद्धि के लिये किसी भी सूर्यकुंड में स्नान एवं सूर्योपासना की जाती है। 
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भगवान सूर्य की प्रसन्नता के लिए रविवार का व्रत, सभी संक्रांतियों एवं सूर्यषष्ठी आदि पर्वों पर व्रत, उपासना, पूजन, रत्नधारण, दान इत्यादि शीघ्र फलदायी होते हैं। यात्रा में नरेंद्र पांडेय, श्रीप्रकाश गुप्ता, अनिल, अजय शर्मा, हिमांशु पांडेय, सुधांशु पांडेय, मनीष गुप्ता शामिल रहे।

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