काशी में महाकवि जयशंकर प्रसाद की कृतियां वर्षभर रंगमंच की यात्रा का आधार बनेंगी। इसके लिए केंद्रीय संस्कृति विभाग के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र ने नाट्य संस्था ‘रूपवाणी’ के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है।
संस्कृति उत्सव के तहत काशी आए प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक गिरीश जोशी ने शनिवार को रूपवाणी के निदेशक व्योमेश शुक्ल के साथ प्रसाद की कृतियों के नाट्य मंचन की योजना पर सहमति बनाई। इसकी शुरुआत 29 जनवरी 2015 को प्रसाद की 125वीं जयंती पर होगी।
‘कामायनी’ के संगीतमय नाट्यमंचन से देश भर में रंगकर्मियों का ध्यान खींचने वाली रूपवाणी ने प्रसाद की कृतियों पर वर्ष भर काम करने की व्यापक योजना तैयार की है। इस योजना का सबसे आकर्षक हिस्सा होंगी जनगीतों की तरह प्रसाद की कविताओं की संगीतमय प्रस्तुतियां।
इसके लिए युवक-युवतियों के एक समूह को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’, ‘हिमाद्रि तुंग शृंग से’ जैसे लोकप्रिय गीत स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों के अलावा नुक्कड़ों, चौराहों, गलियों, पार्कों में गाए जाएंगे। इसके अलावा प्रसाद पर केंद्रित एक पुस्तिका भी प्रकाशित होगी।
इसमें उनके सराय गोवर्धन मोहल्ले में स्थित मकान, दुकान और उनसे जुड़ी अन्य स्मृतियों को प्रकाशित किया जाएगा। कहानियों में ‘गुंडा’, ‘पुरस्कार’ के अलावा नाटकों में ‘चंद्रगुप्त’, ‘अजातशत्रु’, ‘ध्रुव स्वामिनी’ का भी अलग-अलग जगहों पर मंचन किया जाएगा। व्योमेश शुक्ल ने बताया कि प्रसाद पर नाट्य मंचन की शुरुआत 30 जनवरी से होगी।