सिगरा क्षेत्र के लल्लापुरा में छेड़खानी का विरोध करने पर जलाई गई युवती आठ दिन तक मंडलीय अस्पताल में संघर्ष करने के बाद आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई। इलाज के दौरान शुक्रवार को सुबह उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। माता-पिता पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को अपने बेटी की मौत की प्रमुख वजह बता रहे हैं। उनका कहना है कि समय रहते यदि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की होती तो यह नौबत नहीं आती।
लल्लापुरा में रहने वाली युवती को मोहल्ले के ही तीन लोग अक्सर छेड़ते थे। शिकायत करने पर पुलिस युवती और उसके घर वालों को ही परेशान करती। 12 दिसंबर को भी युवती ने आईजी और एसएसपी को शिकायत की थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप है कि 19 दिसंबर को युवती के घर में तीनों युवक घुस गये और उसके ऊपर मिट्टी को तेल उड़ेलकर आग लगा दी। झुलसी युवती को गंभीर हाल में परिवार वालों ने मंडलीय अस्पताल, कबीर चौरा में भर्ती कराया। यहां मजिस्ट्रेट और पुलिस को युवती ने बयान दिया कि उसे छेड़खानी का विरोध करने पर जलाया गया है।
बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पीएम के संसदीय क्षेत्र में इतनी बढ़ी घटना को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं कैबिनेट मंत्री आजम खां ने गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया लेकिन किसी अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर युवती के इलाज में मदद नहीं की।
उसकी हालत बिगड़ती देख दो दिन पूर्व ही अस्पताल के डाक्टरों ने उसे बीएचयू के लिए रेफर कर दिया था लेकिन पैसे के अभाव में परिवार के लोग वहां नहीं ले जा सके। उन्होंने अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। युवती के पिता का कहना है कि घटना के लिए पुलिस प्रशासन जिम्मेदार है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।