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डॉक्टर्स डे 2021: कोरोना काल में खुद का दर्द भूल, वाराणसी के इन चिकित्सकों ने मरीजों की सेवा को बनाया मिशन

Thu, 01 Jul 2021 12:05 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

भारत में एक जुलाई के दिन नेशनल डॉक्टर डे मनाया जाता है। आज का यह खास दिन समाज में डॉक्टरों के महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के लिए है। आज हम आपको वाराणसी के कुछ ऐसे ही डॉक्टरों का परिचय दे रहे हैं। 
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वाराणसी के इन चिकित्सकों ने मरीजों की सेवा को बनाया मिशन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण के दौर में जब हर कोई संक्रमण से भयग्रस्त था, उस समय खुद की और अपने परिवार वालों के सेहत की चिंता छोड़ चिकित्सक मरीजों की सेवा में लगे रहे। किसी ने पिता को खो दिया तो किसी के सिर से मां का साया उठ गया। खुद भी चिकित्सक संक्रमित हुए, लेकिन सब दर्द भूल मरीजों की सेवा साधना को जारी रखा। इसके अलावा बहुत से ऐसे युवा चिकित्सक हैं, जिन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद कोरोना में ड्यूटी शुरू कर दी।

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अंतिम समय में नहीं दे सके पिता का साथ
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ागांव के प्रभारी डॉ. शेरमोहम्मद कोविड डयूटी कर रहे थे। इसी बीच 18 अप्रैल को पिता मो. इदरीश शाह (63) का साथ छूट गया। कुशीनगर स्थित पैतृक आवास पर पिता की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल जाते समय पिता की मौत हो गई। मरीजों की सेवा में लगे डॉ. मोहम्मद अंतिम संस्कार में पहुंचे। उन्होंने कहा कि अंतिम समय में पिता का साथ न देने का मलाल तो हैं लेकिन कोरोना काल में मरीजों की सेवा करने के बाद सुकून मिला।

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डॉक्टरों के लिए रोल मॉडल हैं पद्मश्री प्रो. लहरी

डॉक्टरों के लिए रोल मॉडल हैं पद्मश्री प्रो. लहरी - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू हृदय रोग विभाग से सेवानिवृत्ति पद्मश्री प्रो. टीके लहरी डॉक्टरों के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं। अब भी एक नियमित चिकित्सक की तरह ही उनकी मरीजों की सेवा की साधना जारी है। एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में बैग लेकर वह परिसर स्थित अपने आवास से पैदल ही विभाग तक जाते हैं। निस्वार्थ भाव से मरीजों को परामर्श देने के साथ ही विभाग के अन्य चिकित्सक भी इनसे मरीजों के जांच, इलाज आदि के बारे में सलाह लेते रहते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह केवल पेंशन की उतनी धनराशि लेते हैं, जितने में उनकी दो वक्त की रोटी मिल जाए, बाकी का धन बीएचयू को दान कर देते हैं।

मेडिकल की पढ़ाई पूरी करते ही शुरू कर दी कोविड ड्यूटी

कोलकाता के सशस्त्र सेना बल मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सेवा में लगी मकबूल आलम रोड निवासी डॉ. शांभवी शुक्ला ने अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के साथ ही नोएडा के एक निजी अस्पताल में कोविड ड्यूटी शुरू कर दी। कोरोना संक्रमण के डर से परिवार के सदस्यों ने वापस आने को कहा, लेकिन डॉ. शांभवी ने मना कर दिया। डॉ. शांभवी बताती हैं, कभी कभी मरीजों की सेवा करते हुए हमारे साथी संक्रमित हो जाते थे, जिसकी वजह से मेरा पुरा दिन अस्पताल में बीत जाता था।

भाई और पिता का छूट गया साथ, जारी रखी सेवा साधना

सीएमओ डॉ. वीबी सिंह के सिर से भी कोरोना की दूसरी लहर में अप्रैल महीने में पिता का साया उठ गया। इसके पहले जनवरी में छोटा भाई भी साथ छोड़कर चला गया। कोरोना संक्रमण जब पीक पर था तो अस्पताल में भर्ती पिताजी के सेहत की चिंता और दूसरी ओर मरीजों को बेड, आक्सीजन न मिल पाने की समस्या का सामना बड़ी चुनौती थी। इन सबके साथ ही वह खुद भी संक्रमित हो गए। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि इन सबके बाद भी मरीजों को बेहतर सेवा दिलाए जाने की चुनौती का सामना सभी के सहयोग से किया गया।
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आईएमए सदस्यों ने दिवंगत चिकित्सकों की याद में जलाए दीप

आईएमए सदस्यों ने दिवंगत चिकित्सकों की याद में जलाए दीप - फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर आईएमए वाराणसी शाखा के सदस्यों ने कोरोना काल में दिवंगत हुए चिकित्सकों की याद में घरों, क्लीनिक, नर्सिंग होम, अस्पतालों पर दीप जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। बुधवार शाम सात बजे मोमबत्ती और दीप जलाकर सदस्यों ने उन लोगों को याद किया। बुधवार को आईएमए में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सचिव डॉ. आरएन सिंह, वित्त सचिव डॉ. मधु अग्रवाल ने बताया कि डॉक्टर्स डे के मौके पर निजी और सरकारी कुल 35 चिकित्सकों और विभिन्न परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उनके 15 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा।
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