वाराणसी के मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन के बाद अब डीजल रेल इंजन कारखाना का भी नाम बदलेगा। केंद्र सरकार ने डीरेका का नाम बदलकर बनारस रेल इंजन कारखाना करने का आदेश पत्र जारी किया है। गुरुवार को तत्काल प्रभाव से नामकरण किए जाने का निर्देश दिया गया है। दो माह पूर्व मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस स्टेशन किया गया था।
डीजल इंजन का उत्पादन कम होने के बाद से ही नामकरण को लेकर लगभग साल भर से ही यह कवायद चल रही थी। तीन नामों का प्रस्ताव साल भर पहले भेजा गया था। इसमें दीनदयाल लोको वर्क्स, बनारस लोकोमोटिव और काशी लोकोमोटिव था। डीरेका में अब इलेक्ट्रिक इंजन का उत्पादन अधिक है।
इसलिए नाम बदलकर बनारस किए जाने को लेकर डीरेका कर्मी भी उत्साहित हैं। कर्मियों के अनुसार डीजल इंजन और इलेक्ट्रिकल इंजन का भेद खत्म हो जाएगा। अब पूरे विश्व में बनारस लोको का ही नाम जाएगा। यह बनारस वालों के लिए और भी गर्व की बात है। केंद्र सरकार की अच्छी पहल है।
डीरेका की नींव देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 23 अप्रैल 1956 में रखी थी। इसके लगभग पांच साल बाद अगस्त 1961 डीजल लोकोमोटिव वर्क्स प्रभाव में आया। जनवरी 1964 में प्रथम रेल इंजन राष्ट्र को समर्पित हुआ था।