शुक्रवार सुबह नौ बजे जब बंदी समूह में लामबंद हुए तो अन्य बंदी रक्षकों को संभाल पाना मुश्किल हो गया। सुबह की शिफ्ट में लगे बंदी रक्षक सुरक्षित ठिकाना ढूंढने लगे। वहीं तीन बंदी रक्षकों को कुछ देर के लिए बंदियों ने बंधक भी बनाए रखा। आरोप है कि बंदियों ने उनकी पिटाई भी की। साढ़े नौ बजे के बाद जब आसपास थानों की फोर्स पहुंची तब बंदी रक्षकों को छुड़ाया गया।
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बंदी इतने बेखौफ हो गए थे कि जेल के प्रशासनिक भवन में घुसकर तोड़फोड़ की। कंट्रोल रूम में घुसने का प्रयास किया गया। हालांकि अन्य बंदी रक्षकों के एक जुट होने पर कंट्रोल रूम तक कोई नहीं पहुंच सका। सीसी कैमरे की फुटेज खंगालने पर कई ऐसे बंदी दिखे जो किसी का भी खून बहाने को तैयार थे।
जेल प्रशासन का दावा है कि बंदी की मौत का बहाना बनाकर कुछ बंदियों ने जेल का माहौल खराब करने की कोशिश की। उन पर लगाई गई पाबंदी से नाखुश थे। इसमें अधिकतर पश्चिमी प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बंदी शामिल है, जिन्हें सीसी कैमरों के जरिये चिह्नित किया गया है।
विभागीय जानकारों के अनुसार जेल में इन दिनों बंदियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। पूर्वांचल के बंदियों की पश्चिम से ट्रांसफर होकर आए बंदियों से तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। पिछले कुछ दिनों से बैरक में मारपीट की घटनाएं भी हो चुकी हैं। हालांकि बंदी राजेश की मौत के बाद सभी एकजुट हो गए थे।
जिला जेल चौकाघाट में बंदियों के बवाल की यह पहली घटना नहीं है, इसके पूर्व दो अप्रैल 2016 में जेल बेकाबू हुआ था। बंदियों ने एक डिप्टी जेलर की पिटाई के बाद घंटे भर से अधिक समय तक बंधक बनाए रखा था। पथराव, आगजनी, फायरिंग से जेल की दीवारें दहल उठीं थी।
कई बंदियों और सुरक्षा कर्मियों को चोटें आई थी। उस घटना की भी यादें ताजा हो गईं। इसके पूर्व 2014 में सेंट्रल जेल शिवपुर में बवाल हुआ था और कैदियों ने बंदी रक्षक समेत अन्य कर्मचारियों की बंधक बनाकर पिटाई की थी।
वाराणसी जिला जेल के बाहर बिलखते मृत बंदी के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
छोटी गैबी निवासी बंदी राजेश जायसवाल की मौत के बाद मंडलीय अस्पताल पहुंचे परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया। पत्नी रेखा जायसवाल ने आरोप लगाया कि जेल में बैरक बदलवाने के लिए बंदी रक्षक पैसे की मांग करते हैं। पति से जब भी बात होती थी तो वह यही कहते थे कि बैरक बदलवाने के एवज में बंदी रक्षक पैसे की मांग करते हैं, नहीं देने पर बंदियों को प्रताड़ित किया जाता है। पति से भी पैसे की मांग की गई थी। बैरक में प्रताड़ना सह नहीं पाने के कारण ही पति की जान गई।