प्रदीप राजभर को तीन वर्ष की आयु में बाएं हाथ में पोलियो हुआ था। 2002 में खेल की शुरुआत की। अब तक छह राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभा प्रदर्शित कर चुके हैं। उन्होंने साल 2002 में बाबू केडी सिंह स्टेडियम में पहला प्रदेशस्तरीय मैच खेला था। उनके कोच श्याम सुंदर जायसवाल प्रतिदिन पांच से सात घंटा अभ्यास करा रहे हैं।
हादसे में दोनों पैर बेकार, जज्बे से बनाया मुकाम
रामनगर बड़ागाव निवासी संतोष पांडेय की इच्छा सेना में जाने की थी। लेकिन 2003 में हुए सड़क हादसे में उनके दोनों पैर बेकार हो गए। हादसे से वे करीब तीन वर्ष बेड पर रहे। बताया कि अब व्हील चेयर क्रिकेट खेलते हैं। संतोष ने क्रिकेट के अलावा तलवारबाजी, जेवलिन थ्रो, शॉटपुट में कई खिताब जीते हैं।
बताया कि 2017 तक एक स्कूल में संस्कृत और कंप्यूटर पढ़ाते थे। उसके बाद नौकरी छोड़ दी। 2018 से क्रिकेट खेलना शुरू किया। उन्होंने हिमाचल में आयोजित क्रिकेट लीग में यूपी टीम का प्रतिनिधित्व किया। अबतक 20 से अधिक मुकाबले खेल चुके हैं। अब आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे हैं।
वाराणसी में होगी राष्ट्रीय प्रतियोगिता
ऑल इंडिया दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन के महासचिव डॉ. संजय चौरसिया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता 17 सितंबर को वाराणसी में खेली जाएगी। बताया कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता मई माह में आयोजित की जाएगी। इसमें देश के जाने-माने दिव्यांग क्रिकेटर को खेलने का मौका मिलेगा।