धनंजय सिंह का सियासी सफर रसूखदार रहा है। धनंजय 27 साल की उम्र में पहली बार निर्दलीय विधायक बन गया था। धनंजय सिंह ने तीन शादियां कीं। उसकी पहली पत्नी ने शादी के नौ महीने बाद ही संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी।
पूर्व सांसद धनंजय सिंह का सियासी सफर रसूखदार रहा है। धनंजय सिंह 27 साल की उम्र में वर्ष 2002 में रारी विधानसभा सीट पर चुनाव में निर्दलीय विधायक बना था। इसके बाद 2007 में वह जेडीयू के टिकट पर विधायक बना।
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वह बसपा में भी शामिल हुआ और 2009 में लोकसभा चुनाव लड़कर जौनपुर का सांसद बना। इसी खाली सीट पर पिता राजदेव सिंह को बसपा के टिकट पर उपचुनाव में जीत मिली थी।
राजनीतिक पतन की शुरुआत
2012 के चुनाव में धनंजय ने अपनी पूर्व पत्नी डॉक्टर जागृति सिंह को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर खड़ा किया लेकिन वह हार गई। फिर 2014 में लोकसभा और 2017 में विधानसभा में भी जौनपुर से हाथ आजमाया लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 2017 के चुनाव में पारिवारिक विवाद से नाराज मुलायम सिंह चुनाव प्रचार के लिए सिर्फ दो जगह गए थे।
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इनमें से एक था जौनपुर का मल्हनी विधानसभा क्षेत्र। यहां मंच से सपा के प्रत्याशी पारसनाथ यादव के पक्ष में प्रचार करते हुए उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि ''हम पारस के लिए आए हैं, आप लोग इन्हें जिताएं। इसके बाद पूरा खेल पलट गया और जो सीट धनंजय के कब्जे में दिख रही जीत पारस यादव को मिल गई।
आपराधिक और राजनीतिक इतिहास
पहले जौनपुर के टीडी कॉलेज व फिर लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की। लखनऊ विश्वविद्यालय में ही उसका परिचय वर्तमान अयोध्या के गोसाईगंज विधायक व छात्र नेता अभय सिंह से हुई। यहीं से धनंजय सिंह भी विश्वविद्यालय की ''दबंग'' राजनीति में शामिल हो गया।
कुछ ही साल में लखनऊ के हसनगंज थाने में उस पर हत्या और सरकारी टेंडरों में वसूली से जुड़े आधा दर्जन मुक़दमे दर्ज हो गए। 1998 तक 50 हजार के इनामी बन चुके धनंजय सिंह पर हत्या और डकैती समेत 12 मुक़दमे दर्ज हो चुके थे।
1998 का भदोही फेक एनकाउंटर
तारीख 17 अक्तूबर 1998 थी। पुलिस को सूचना मिली कि 50 हजार का इनामी अपराधी धनंजय सिंह तीन अन्य लोगों के साथ भदोही मिर्ज़ापुर रोड पर बने एक पेट्रोल पंप पर डकैती डालने वाला है। इस पर स्थानीय पुलिस ने दिन के 11.30 बजे पेट्रोल पंप पर छापा मारा और मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में एक को धनंजय सिंह बताकर मृत घोषित कर दिया गया।
सच ये है कि धनंजय जिंदा था और फ़रार था लेकिन कई महीने तक अपनी मौत की खबर पर चुप रहा। फ़रवरी 1999 में जब वह पुलिस के सामने पेश हुआ, तब भदोही फ़ेक एनकाउंटर का राज खुला। धनंजय के सामने आने के तुरंत बाद मामले में मानवाधिकार आयोग की जांच बैठी और बाद में फेक एनकाउंटर में शामिल 34 पुलिसकर्मियों पर मुकदमे दर्ज हुए।
टकसाल सिनेमा शूट आउट
बनारस के पहले ओपन शूटआउट के तौर पर पहचाने जाने वाले इस शूटआउट में धनंजय सिंह का सामना कभी मित्र रहे अभय सिंह से हुआ। पांच अक्तूबर 2002 को बनारस से गुज़र रहे धनंजय के काफिले पर हमला हुआ। घटना टकसाल सिनेमा के सामने हुई। इस मुठभेड़ में दिन-दहाड़े बनारस की सड़कों पर दोनों तरफ से गोलियां चली थीं। हमले में धनंजय के गनर और उसके सचिव समेत चार लोग घायल हुए थे। तब यह जौनपुर के रारी के विधायक के तौर पर धनंजय ने इस मामले में अभय सिंह के खिलाफ मुक़दमा भी दर्ज करवाया था।
मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने लगाया था आरोप
जुलाई 2018 में बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने अपने पति की हत्या की साज़िश का आरोप धनंजय सिंह पर लगाया था। पुलिस को दी अर्ज़ी में उन्होंने कहा था कि धनंजय ने उनके पति की हत्या इसलिए करवा दी क्योंकि वह 2019 का लोकसभा चुनाव जौनपुर से लड़ने वाला था। इस मामले में पुलिस की जांच जारी है और धनंजय पर अभी तक कोई मुकदमा दायर नहीं हुआ है।
दूसरी पत्नी पर घरेलू नौकर की हत्या का आरोप लगा
धनंजय सिंह ने तीन शादियां कीं। उसकी पहली पत्नी ने शादी के नौ महीने बाद ही संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी। दूसरी पत्नी डॉक्टर जागृति सिंह अपनी घरेलू नौकरानी की हत्या करने के आरोप में नवंबर 2013 में गिरफ़्तार हुई थी। इसी मामले में सबूत मिटाने के आरोप में धनंजय सिंह भी नामज़द हुआ था। बाद में जागृति से उसका तलाक़ हो गया और 2017 में उसने एक व्यावसायिक परिवार से आने वाली श्रीकला रेड्डी से पेरिस में तीसरी शादी की।