पंचगंगा घाट से तुलसी विवाह के लिए निकली बारात।
- फोटो : अमर उजाला
लक्ष्मी संग शेष शैय्या पर विराजे भगवान विष्णु
एकादशी पर पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव मंदिर में भगवान विष्णु-लक्ष्मी को शेष शैय्या पर विराजमान कराकर शृंगार हुआ। पीत वस्त्र धारण कराया गया। मंदिर के प्रधान अर्चक आचार्य मुरलीधर गणेश पटवर्धन ने बताया कि भगवान विष्णु का कार्तिक पूर्णिमा तक अलग-अलग रूपों में शृंगार होगा। अस्सी के विष्णु मंदिर में नवीन धोती धारण करवाकर शृंगार हुआ। भोग में सकरकंद, केला, गन्ना आदि का भोग लगा। दशाश्वमेध स्थित बृहस्पति मंदिर में पंचमुखी शृंगार कर पीतांबरी धारण कराया गया। आदिकेशव मंदिर में दुपट्टा व सिला पीला वस्त्र धारण कर पीता पेड़ा व केला आदि भोग लगा।
पंचगंगा घाट पर हुआ विशेष आयोजन
देवउठनी एकादशी पर पंचगंगा घाट से गोधुलि बेला में गणेश घाट से श्रीमठ तक गाजेबाजे के साथ बरात निकली। शहनाई, बैंडबाजा आदि वाद्य यंत्रों की गूंज रही। रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य के सानिध्य में द्वारपूजा के बाद पूजन-अर्चन के साथ ही विधिवत शालिग्राम-तुलसी विवाह हुआ। तुलसी घाट पर महंत जी के सानिध्य में तुलसी विवाह हुआ। अमर नगर कॉलोनी के प्राचीन शिव मंदिर के पास सिंधी समाज की महिलाओं ने भी तुलसी विवाह कर पूजन किया।