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सुरसरि के तट पर मौन रहकर आज श्रद्धालु लगाएंगे पुण्य की डुबकी

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मौनी अमावस्या पर मंगलवार को श्रद्धालु मौन व्रत रखकर सुरसरि के तट पर पुण्य की डुबकी लगाएंगे। पुण्यकाल में सूर्र्योदय के साथ ही गंगा घाटों पर स्नान, दान और पुण्य का सिलसिला आरंभ हो जाएगा। अस्सी से राजघाट तक स्नान के लिए प्रमुख घाटों पर बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस को भी अलर्ट किया गया है।
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बीएचयू ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि इस पवित्र तिथि पर मौन रहकर अथवा मुनियों के समान आचरण पूर्वक स्नान-दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन त्रिवेणी अथवा गंगातट पर स्नान-दान की अपार महिमा है। मौनी अमावस्या को नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नान करके तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। इस दिन साधु, महात्मा तथा ब्राह्मणों के लिए अग्नि प्रज्वलित करना चाहिए तथा उन्हे जाड़े के वस्त्र देने चाहिए। इस दिन गुड़ में काला तिल मिलाकर लड्डू बनाना चाहिए तथा उसे लाल वस्त्र में बांधकर दान देना चाहिए। स्नान- दान आदि के अतिरिक्त इस दिन पितृ-श्राद्धादि करने का भी विधान है। इस दिन तिल अवश्य खाना चाहिए। तिल सृष्टि का प्रथम अन्न है।
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