इस दौरान गंगा किनारे उनको पानी में तैरता हुआ पत्थर मिला था। संत उसे गुरु रविदास की निशानी मानकर मंदिर ले आए। ट्रस्टी केएल सरोआ ने बताया कि इसे चमत्कारिक पत्थर मानकर सोने की पालकी में संत रविदास की प्रतिमा के सामने बुलेट प्रूफ कांच में रखा गया है।
चार दिन पहले सीर गोवर्धन क्षेत्र में इक्का-दुक्का लोग नजर आ रहे थे। वहीं, शुक्रवार शाम को संगत और पंगत भी गुलजार हो उठी। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के पहुंचने से रौनक भी बढ़ गई है। शुक्रवार को सीर गोवर्धन का मेला क्षेत्र लंगर में बनने वाले पकवानों की खुशबू से महक उठा।
लंगर क्षेत्र में पंगत की तैयारियां चल रही थीं। वहीं रैदासियों के आने का सिलसिला भी जारी है। रैदासियों के ठहरने से लेकर भजन कीर्तन के लिए स्थान तय होने के साथ ही सेवादारों की फौज अनवरत सेवा में लगी हुई है। कोरोना संक्रमण को देख विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जगह-जगह जागरूक करने वाले पोस्टर से मास्क के इस्तेमाल और शारीरिक दूरी के पालन की अपील की जा रही है।
लंगर तैयार करने के लिए सेवादारों का जत्था अलग-अलग पालियों में तैनात हैं। शनिवार से भीड़ ज्यादा बढ़ेगी और 14 फरवरी को संत निरंजन दास और डेरा से आने वाले संतों का इंतजार श्रद्धालु कर रहे हैं।