चक्रपुष्करणी तीर्थ पर श्रद्धालुओं ने अक्षय पुण्य की कामना से डुबकी लगाई। मणिकर्णिका देवी का आशीष लिया और सुख-समृद्धि का आशीष भी मांगा। कोरोना संक्रमण के कारण दो साल से स्थगित सार्वजनिक स्नान के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आए तीर्थयात्री भी चक्रपुष्करणी कुंड में स्नान करने पहुंचे।
बुधवार को अक्षय तृतीया के दूसरे दिन मणिकर्णिका तीर्थ स्थित चक्रपुष्करणी कुंड पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा। दोपहर एक बजे जैसे ही मां मणिकर्णिका की आरती संपन्न हुई। इसके बाद हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए प्रधान पुरोहित जयेंद्र नाथ दुबे बब्बू महाराज ने जैसे ही कुंड में डुबकी लगाई तो पीछे से श्रद्धालु भी कूद पड़े। पुण्य की डुबकी लगाने के बाद सभी ने कुंड के मध्य में विराजमान मां मणिकर्णिका के चरख पखारकर आशीर्वाद लिया।
इसके पूर्व अक्षय तृतीया की मध्यरात्रि में मणिकर्णिका देवी के कुंड पर भव्य शृंगार किया गया। माता की प्रतिमा को गुलाब, बेला, चमेली समेत विविध पुष्पों से सजाया गया। कुंड को भी फूल और पत्तियों के साथ ही रंगीन रोशनी से सजाया गया था। माता की सवारी पुरोहित के आवास से निकलकर कुंड पर पहुंची। माता की प्रतिमा को कुंड के बीच में विराजमान कराकर आरती उतारी गई। दोपहर में स्नान के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण भी किया गया।