बाबा विश्वनाथ के बाल स्वरूप बाबा बटुक भैरव का रविवार को त्रिगुणात्मक श्रृंगार हुआ। सुबह से लेकर रात तक तीन स्वरूपों में बाबा की झांकी के दर्शन कर भक्त भी निहाल हुए। कमच्छा स्थित बाबा बटुक भैरव के दरबार में देर रात तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
रविवार को मंगल बेला में महंत जितेंद्र मोहन पुरी ने बाबा का पंचामृत स्नान कराया। इसके बाद श्वेत पुष्पों से सात्विक शृंगार किया गया। तत्पश्चात पंचमेवा, फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया और मंगला आरती हुई। भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए।
शाम को गुलाब के पुष्पों सहित स्वर्ण और रजत आभूषणों से बाबा बटुक भैरव का राजसी रूप में शृंगार हुआ। बाबा को 56 भोग अर्पित किया गया। रात्रि में बाबा की आरती उतारी उतारी गई। मध्यरात्रि में महाआरती से पहले बाबा का तामसी श्रृंगार हुआ।
बाबा के विग्रह को 1100 काला गंडा और 1100 रुद्राक्ष के दानों से सजाया गया। पंच मकार के भोग के साथ ही बाबा का खप्पर कारज से भरा गया। महाआरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।