कार्तिक पूर्णिमा के दिन आप गंगा नदी में स्नान करने के बाद 11 दीपों का दान करें। फिर नदी किनारे स्थित किसी मंदिर में पूजा अर्चना कर घर लौट जाएं। घर जाकर मां तुलसी के गमले, मंदिर में घी का दीया जला दें । ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा होगी। घर पर कनकधारा स्त्रोत का भी पाठ कर सकते हैं।
देव दीपावली के दिन घर के पास के किसी मंदिर में जाकर अपने आराध्य की पूजा करें। मंदिर में अपने आराध्य को मंत्रोच्चार करते हुए दीप दिखाएं। मंदिर के बाहर एक दीप पीपल के पेड़ के पास जला दें। फिर वहां अगर कोई गरीब या जरुरतमंद है तो उसे पैसे, अनाज या अपनी यथाशक्ति वस्तुओं का दान कर दें। ऐसा करने से आपके घर की आर्थिक उन्नति होगी और आप जीवन में काफी तरक्की करेंगे।
घर पर घी या सरसों के तेल के 11 दीपक जलाएं। पहले मिट्टी के दीये को मां तुलसी के पास ऊं तुलसीभ्य: नम:मंत्र का उच्चारण करते हुए रख दें। एक दीये को आप घर के दरवाजे के बाहर रखें। बाकी बचे 9 दीयों को आप मंदिर में रख दें। इसके बाद आप अपने आराध्य की उपासना करने के साथ विष्णु सहस्रनाम और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से आपका भाग्य समृद्ध होगा और घर में लक्ष्मी का वास होगा।
कैथी स्थित गंगा गोमती के पावन संगम पर मां जान्हवी प्रज्ञा सेवा समिति की ओर से देव दीपावली महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। सवा लाख मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे और शाम हथियाराम मठ के महामंडलेश्रर भवानी नंदन यती महाराज द्वारा गंगा आरती की जाएगी। साथ ही भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम होगी। वहीं ढकवां स्थित गौरीशंकर महादेव गंगा घाट पर 51 हजार मिट्टी के दीप जलाकर भंडारे का प्रसाद भी लोग ग्रहण करेंगे। रामपुर चंद्रावती गंगा घाट पर भी 21 हजार मिट्टी के दीये जलाएं जाएंगेे।
सेवापुरी के रामेश्वर स्थित वरुणा घाट पर नव युवा समिति की ओर से वरुणा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। समिति के आयोजक पं. रोहित तिवारी के अनुसार 5100 दीप सहित 11 बाल ब्राह्मणों के नेतृत्व में कार्यक्रम होगा। झांकी व सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया है।