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मौत की डोर चीनी मांझे की वाराणसी में धड़ल्ले से हो रही बिक्री, जानें कहां से पहुंची खेप

Tue, 05 Jan 2021 01:49 AM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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चीनी मांझा - फोटो : अमर उजाला
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मकर संक्रांति का त्योहार नजदीक आते ही वाराणसी में प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री तेज हो गई है। दिल्ली के अलावा बरेली, आगरा और पश्चिमी  उतर प्रदेश के कुछेक अन्य जिलों से चोरी छुपे मांझे की बड़ी खेप शहर में आ गई है। यहीं से पूर्वांचल के अन्य जिलों के साथ ही बिहार तक भी भेजी जा रही है। इसके बावजूद जिला पुलिस और प्रशासन ने तलाशी अभियान नहीं शुरू किया। 

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चीने मांझे की चपेट में आने से बीते साल अगस्त में पांडेयपुर क्षेत्र में मासूम बच्ची की मौत हो गई थी और उसके पिता घायल हो गए थे। इसके अलावा आए दिन लोगों के साथ बेजुबान पशु-पक्षी भी घायल होते रहते हैं। इसके बावजूद इसकी बिक्री रुक नहीं रही है।  शहर में दालमंडी, हड़हा, बेनिया, औरंगाबाद, खोजवा, सरैया, नदेसर जैसे दर्जनों ऐसे स्थान हैं, जहां चीनी मांझा आसानी से मिल जाता है लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर में नहीं आ पाता है। इस संबंध में एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि जल्द ही शहर के चिह्नित स्थानों में अभियान चला कर प्रतिबंधित चीनी मांझा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आमजन से भी अपील है कि वह चीनी मांझा न खरीदें।
 

छात्राओं ने चीनी मंझे का किया बहिष्कार

सुबह-ए-बनारस क्लब की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम
मंझे से बढ़ती घटनाओं को देखते हुए छात्राओं ने हाथ में पतंग लेकर मंझे का बहिष्कार किया। जिस तरह से लगातार चीनी मंझे से गला, हाथ कटने जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, उसको देखते हुए शासन-प्रशासन की ओर से चीनी मंझे का प्रयोग न करने की अपील की जा रही है। सोमवार को वल्लभ विद्यापीठ बालिका इंटर कॉलेज में सुबह-ए-बनारस क्लब की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में हाथ में पतंग लेकर छात्राओं ने चाइना भगाओ-जान बचाओ स्लोगन के साथ चीनी मंझे से पतंग न उड़ाने की अपील की। इस दौरान कालेज की प्रधानाचार्य डॉक्टर मुक्ता पांडेय ने छात्राओं से घर और घर के आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने के लिए कहा। कार्यक्रम में अध्यक्ष मुकेश जायसवाल, विजय कपूर, नंदकुमार टोपी वाले सहित कई लोग मौजूद रहे।
 

लोगों की जिंदगी का महत्व समझें

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हाल ही में चीनी मांझे से घायल हुए नरिया क्षेत्र निवासी अंकुर शुक्ला ने कहा कि इस मांझे से पतंग उड़ाने वालों को लोगों की जिंदगी का महत्व समझना चाहिए। जानकारों के अनुसार, चीनी मांझा मैटेलिक पाउडर, नायलॉन, लोहे व कांच के चूरे को मिलाकर बनाया जाता है, इस वजह से इसमें खिंचाव ज्यादा होता है और यह आसानी से टूटता नहीं है। चीनी मांझे की कीमत भी देसी मांझे से कम होती है।

लोगों को किया जागरूक

युवा फाउंडेशन एवं अनमोल सेवा समिति की ओर से सोमवार को हनुमान फाटक इलाके में पतंगबाजी के लिए चीनी मांझे का प्रयोग न करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया। संस्थान के लोगों ने कहा कि यह मांझा शहरवासियों के लिए खतरा बन चुका है। समिति की सीमा चौधरी ने कहा कि इस मांझे की जद में आकर लोग घायल हो रहे हैं। जागरूकता अभियान में अरविंद चक्रवाल, मीना चक्रवाल, मनीष श्रीवास्तव, रवींद्र मिश्रा, मनीष कुमार श्रीवास्तव, रूपक विश्वकर्मा समेत अन्य लोग शामिल थे।
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