कोरोना के नए रूप स्ट्रेन के खतरे को देखते हुए अब इसके कारणों की जानकारी करने में वैज्ञानिक जुट गए हैं। भारत में हालांकि अभी स्ट्रेन का खतरा कम है लेकिन बड़ों के मुकाबले बच्चों पर इसका असर कम रहने की संभावना है। चिकित्सकों के मुताबिक भारत में समय-समय पर लगने वाले टीके बच्चों को बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं। हालांकि स्ट्रेन का खतरा बच्चों पर कितना होगा इस पर अभी अध्ययन चल रहा है। इधर, बीएचयू प्राणी विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक ब्रिटेन में बच्चों पर अध्ययन चल रहा है, वहां बच्चों में संक्रमण की दर अधिक हैं।
कोविड 19 में भी यह देखा गया कि बड़ों के मुकाबले बच्चों में कम खतरा दिखा। बच्चों में स्ट्रेन का संक्रमण कितना प्रभावी होगा इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। इतना जरूर है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में बच्चों को हर बीमारी से बचाव के लिए समय-समय पर जो टीका लगाया जाता है, इसमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है। - प्रो. विनीता गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ, बीएचयू
बच्चों को जन्म के समय बीसीजी का टीका लगता है। इसके अलावा पांच साल तक बीसीजी, डीपीटी, टिटनेस, डिप्थीरिया के टीके भी लगाए जाते हैं। टीका फेफ ड़े संबंधी बीमारियां, बुखार, सर्दी, खांसी आदि बीमारियों से बचाव में सहायक होता है। - डॉ. सीपी गुप्ता, बालरोग विशेषज्ञ, मंडलीय अस्पताल
यह बताना मुश्किल होगा कि स्ट्रेन का असर बच्चों पर कितना प्रभावी रहेगा। इस पर कई देशों में अध्ययन चल रहा है। भारत में बच्चों को अलग-अलग वायरस से बचाने के लिए वैक्सीनेशन किया जाता है। इससे वायरस, चिकनपॉक्स, बच्चों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता अधिक होती हैं। आस्ट्रेलिया में हुए एक रिसर्च में प्रारंभिक परिणाम में पाया गया है कि बच्चों को लगने वाला बीसीजी का टीका कोरोना संक्रमण से लड़ने में सहायक है। - डॉ. अशोक राय, बाल रोग विशेषज्ञ
ब्रिटेन के वैज्ञानिक बच्चों में स्ट्रेन के संक्रमण का पता लगाने में लगे हैं। बीएचयू के साथ संयुक्त अध्ययन के प्रारंभिक परिणाम में वहां बच्चों में संक्रमण का खतरा 65 फीसद अधिक मिला है। अभी भारत में तो स्ट्रेन का संक्रमण नहीं है। यहां बच्चों को समय से टीके लगाए जाते हैं, इससे उनमें रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है। - प्रो.ज्ञानेश्वर चौबे, प्राणी विज्ञान विभाग, बीएचयू