दीपावली पर्व के लिए बाजार जगमग हो चुका है। कोरोना की मार से काफी हद तक मुक्ति मिलने के बाद बाजार गुलजार होने से व्यापारियों के चेहरे खिल गए हैं। बाजार भी दीपावली से संबंधित वस्तुओं से पट सा गया है। बदलते दौर में दीपावली पर घर-आंगन रोशन करने के लिए इस बार मोमबत्ती के नए रूप लोगों को ध्यान खींच रहे हैं।
वाराणसी के बाजार में ऐसी मोमबत्तियां आई हैं, जो रोशनी संग घरों में त्योहार पर सुगंध भी बिखेरेंगी। दीपावली पर घर के कोने-कोने को रोशन करने के लिए बाजार में कई अलग-अलग तरह की मोमबत्तियां आई हैं। ये मोमबत्तियां दिखने में तो सेब, संतरा, अनार और शरीफे की तरह हैं।
बाजार में आई नई तरह की मोमबत्तियां एक जगह रखी-रखी पिघलतीं नहीं बल्कि तैरती भी हैं। बाजार में भगवान गणेश, बुद्धा, खरगोश आदि कई डिजाइन और शेप की फ्लोटिंग कैंडल उपलब्ध हैं। दुर्गाकुंड स्थित एक दुकान के संचालक संजीव बताते हैं कि आज कल लोग जलाने के साथ घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए फ्लोटिंग कैंडल की काफी मांग कर रहे हैं।
ऐसे में अलग-अलग शेप व डिजाइनर कैंडल के मुताबिक कीमत रखी है। इसकी कीमत 50 से शुरू होती है। सबसे महंगे 500 रुपये की सेंट वाले कैंडल सेट हैं। इसके अलावा फ्लावर कैंडल, लाइट कैंडल, स्टोन कैंडल आदि भी मौजूद हैं।
वोकल फॉर लोकल: पीएम के आह्वान से उत्साहित हैं हस्तशिल्पी
इको फ्रेंडली दीये बनाने वालों के चेहरे पर इस बार मुस्कान दिख रही है। इसकी दो मुख्य वजहे हैं। पहली चीनी उत्पादों के बहिष्कार, दूसरी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वोकल फॉर लोकल के लिए जनता से आह्वान करना। वहीं कोरोना काल में लोगों में बढ़ी पर्यावरण के प्रति लोगों की सजगता भी एक वजह मानी जा रही है।
दरअसल, लोग गाय के गोबर से बने दीये और लक्ष्मी-गणेश की खरीदारी करने के लिए आगे आए हैं। हर कोई अपनी-अपनी पसंद के सामानों की खरीदारी कर रहा है। सबसे ज्यादा दीयों की खरीदारी हो रही है। दीया, मूर्ति बनाने वाले अखिलेश बताते हैं कि पर्यावरण के अनुकूल गाय के गोबर से कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
इसके बनारस सहित चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, जौनपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में कारीगर है। गाय के गोबर से दीया, मूर्ति, लकड़ी सहित सजावट और पूजा पाठ के कई उत्पाद बनाते हैं। अब पीएम के आह्वान के बाद यह उम्मीद है कि कारोबार और अच्छा होगा। इसको देखते हुए अभी से ही तैयारी चल रही है।