Varanasi News: वैक्सीन बनाने वाली कंपनी द्वारा प्रधानमंत्री को उस लाभ में हिस्सेदार बनाते हुए उन्हें चंदा के रूप में कंपनी द्वारा अर्जित लाभांश दिया गया। याचिका में यह भी आरोप है कि विपक्षीगणों द्वारा यह जानते हुए कि इस दवा का साइड इफेक्ट्स होगा, लोगों को जान-बूझकर मौत के मुंह में धकेला गया।
कोरोना महामारी को लेकर बनाई गई वैक्सीन से हो रहे साइड इफेक्ट को लेकर दाखिल परिवाद की पोषणीयता को लेकर सोमवार को बहस पूरी हो गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ (एमपी-एमएलए कोर्ट) की अदालत में दाखिल इस परिवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीरम इंस्टीट्यूट कंपनी, उसके चेयरमैन, सीईओ, एस्ट्रोजेन कंपनी और उसके चेयरमैन समेत 28 लोगों को विपक्षी बनाया गया है।
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अदालत ने इस मामले में पोषणीयता पर बहस पूरी होने के बाद आदेश के लिए 15 जून की तिथि नियत कर दी। प्रकरण के अनुसार, युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष व अधिवक्ता विकास सिंह की ओर से कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीरम इंस्टीट्यूट कंपनी, उसके चेयरमैन, सीईओ, एस्ट्रोजेन कंपनी और उसके चेयरमैन समेत सभी 28 विपक्षीगणों ने आपस में मिलीभगत करते हुए बिना किसी परीक्षण के कोविड शील्ड नामक दवा बनाकर लोगों को भय दिखाकर कोरोना वैक्सीन बताकर लोगों को जबरन लगवाए और उससे लाभ अर्जित किए।
इस मामले की जानकारी होने पर युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष द्वारा याचिका कोर्ट में दाखिल की गई है। याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायहित और लोक हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी 28 विपक्षीगण को बतौर अभियुक्त तलब कर उन्हे दंडित किया जाए।
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साथ ही यह भी मांग की गई है कि इस मामले में जितने भी लोग इस दवा के साइड इफेक्ट से पीड़ित है सभी को क्षतिपूर्ति दिलाई जाए। अदालत में परिवादी की र से अधिवक्ता गोपाल कृष्ण ने पक्ष रखा।