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Cyber Crime: तीन दिन तक घर में डिजिटल अरेस्ट कर ऐंठे 28.75 लाख रुपये, पुलिस व CBI के नाम पर साइबर फ्रॉड

Sat, 06 Jul 2024 06:58 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

साइबर ठगों का दुस्साहस इस कदर बढ़ गया है कि पुलिस और सीबीआई के नाम पर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला वाराणसी में सामने आया है। यहां तीन दिन तक घर में डिजिटल अरेस्ट कर जालसाजों ने 28.75 लाख रुपये ऐंठ लिए। 
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Cyber Crime - फोटो : istock
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विस्तार
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वाराणसी के बागहाड़ा, सोनारपुरा के निहार पुरोहित को उनके घर में तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर जालसाजों ने 28 लाख 75 हजार 17 रुपये ऐंठ लिए। निहार की तहरीर पर साइबर क्राइम पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

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निहार ने पुलिस को बताया कि खुद को ट्राई का अधिकारी बताते हुए उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति ने कॉल किया। कहा कि आपके आधार कार्ड से एक सिम मुंबई से लिया गया है। उस सिम से उत्पीड़न और अश्लील मैसेज की कई शिकायतें मिली हैं। मुंबई फोर्ट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज है। निहार ने बताया कि उन्होंने कुछ नहीं किया है। इस पर ट्राई के अधिकारी ने पुलिस स्टेशन में कॉल कनेक्ट कर तीन दिन तक घर से निकलने के लिए मना किया। 

मोबाइल और लैपटॉप पर स्काइप एप डाउनलोड कराकर वीडियो कॉल पर बताया कि आपको घर में अरेस्ट किया जाता है। कहा आपका संबंध नरेश गोयल केस से है और यह बहुत बड़ा मनी लांड्रिंग का स्कैम है। फिर उन लोगों ने फोन पर सीबीआई के अधिकारी से बात कराई। उसने गिरफ्तारी का वारंट दिखाया और स्काइप पर भेजा। इसके बाद केस खत्म करने और गिरफ्तारी न करने के साथ ही बैंक खाते को आरबीआई से वेरिफाई होने तक लगभग 28 लाख 75 हजार 17 रुपये ले लिए।

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19.92 लाख खाते में भेजकर 19 लाख निकाले, केस
गनेशपुर, तरना निवासी 33 साल के युवक के बैंक खाते में व्यक्तिगत ऋण के रूप में 19,92,921 रुपये जमा किए गए। उसके बाद खाते से 19 लाख निकाल लिए। साइबर फ्रॉड के आरोप में युवक ने साइबर क्राइम पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। युवक ने बताया कि तीन जुलाई को उसके पास एक कॉल आया था। फोन करने वाले ने कहा कि आपकी आईडी का उपयोग अवैध सामान वाले पार्सल को इराक भेजने के लिए किया गया है। उन्हें अंधेरी पूर्व, मुंबई में अपराध शाखा से सीपीपी प्रमाणपत्र लेने का निर्देश दिया गया और कॉल उन्हें स्थानांतरित कर दी गई। अपराध शाखा ने आधार कार्ड, पता, माता-पिता का नाम और बैंक खातों की संख्या सहित विवरण की जांच शुरू की। इसके बाद मोबाइल पर एक एप इंस्टॉल कराया और उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। फिर, उनके खाते में पैसा जमा कर उसे निकाल लिया।
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