वाराणसी। रिक्शा चलाकर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करने वालों के लिए राहत भरी खबर है। अब वह सोलर साइकल रिक्शा चलाकर कम मेहनत में अधिक कमाई कर सकेंगे। बहुत जल्द ही काशी की सड़कों पर ऐसे रिक्शे चलते नजर आएंगे। बीएचयू के शोध छात्र ने डिजाइन इनोवेशन सेंटर की मदद से ऐसा ही एक रिक्शा बनाया है। इसकी खासियत है कि दिन में सूर्य की रोशनी से चलने के साथ ही इसमें उर्जा का संरक्षण होगा, जिससे रात में भी इसे चलाया जा सकेगा। इसके अलावा चार्जिंग की भी सुविधा रहेगी।
सड़कों पर चलने वाले इलेक्ट्रिकल रिक्शा के बाद अब सोलर पैनल लगा साइकल रिक्शा बनकर तैयार हो गया है। सामान्य रिक्शा चलाने की तुलना में इस रिक्शे को चलाने में बहुत कम मेहनत लगेगी। इसके अलावा इससे ऊर्जा बचत भी किया जा सकेगा, जिससे कि मोबाइल चार्जर, छोटा पंखा भी चलाया जा सकेगा। बीएचयू कला संकाय के इतिहास कला विभाग के शोध छात्र स्वेन ने दृश्य कला संकाय के तहत चलने वाले डिजाइन इनोवेशन सेंटर में ऐसा रिक्शा बनाया है। मूल रुप से यूएसए निवासी स्वेन का कहना है कि पहले उसने प्रोजेक्ट बनाकर सेंटर के समन्वयक डॉ. मनीष अरोरा को दिया और जब प्रोजेक्ट मंजूर हो गया तब उसने काम शुरू कर दिया। करीब 15 दिन में सोलर साइकल रिक्शा बनकर तैयार हो गया है। बीएचयू परिसर में इसका ट्रायल भी हो चुका है। अब इस मॉडल को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजने की तैयारी चल रही है।