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अभियान चला कर बंद कराएं चीनी मांझा की बिक्री

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वाराणसी। प्रतिबंधित चीनी मांझा से गला कटने से सात वर्षीय कृतिका की मौत को लेकर सोमवार को लोग गम और गुस्से में दिखे। बच्ची के दादा और पिता ने अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ रायफल क्लब में डीएम की गैरमौजूदगी में एडीएम सिटी गुलाब चंद्र से मुलाकात की। सभी ने मांग की कि चीनी मांझा बेचने वालों के साथ ही खरीदने वालों के खिलाफ भी अभियान चला कर कार्रवाई की जाए।
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बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेश मिश्र और विनोद कुमार पांडेय के नेतृत्व में गए अधिवक्ताओं ने इस बात को लेकर रोष व्यक्त किया कि चीनी मांझा की बिक्री पर रोक के बावजूद यह जानलेवा सामान बाजार में खुलेआम क्यों बिक रहा है। प्रशासन की लापरवाही की वजह से मासूम कृतिका की मौत हुई है। चीनी मांझा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन अभियान चलाकर दोषियों को चिन्हित कर गिरफ्तार कर जेल भेजे। कृतिका के परिजनों को मुआवजा दिया जाए। अधिवक्ताओं को एडीएम सिटी ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं, कृतिका के दादा ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि चीनी मांझा का कारोबार बंद हो और परिवार को आर्थिक मुआवजा दिया जाए। इस दौरान मौके पर मौजूद कृतिका के पिता संदीप गुप्ता की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और वह एक भी शब्द नहीं बोल पाए। अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल में मुरलीधर सिंह, प्रमोद जायसवाल, सजीवन यादव, प्रदीप राय, प्रवीण मिश्र, मनीष सिंह, देवेंद्र सिंह देव, प्रेमसागर चौबे आदि शामिल रहे।
परिजनों को मिले एक करोड़ का मुआवजा, लापरवाह अधिकारी हों दंडित
वाराणसी। पिता के साथ घर लौट रही मासूम कृतका के असमय ही काल के गाल में समाने की घटना से काशीवासी खासे दुखी हैं। बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने इस प्रकरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा है। पत्र में घटना के लिए जिम्मेदार जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ ही परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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साथ ही, पूरे प्रदेश में चीनी मांझा की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने को कहा है। अधिवक्ता नित्यानंद राय ने कहा कि वर्तमान जिलाधिकारी को बीती 14 जनवरी 2020 की रात उनके मोबाइल पर फोन कर शहर में चीनी मांझा की बिक्री की जानकारी विस्तार से दी थी और उनसे गोपनीय जांच की मांग की थी। पुलिस चीनी मांझा बेचने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करती है, नतीजतन बच्ची की मौत हो गई।
क्यों खतरनाक है चीनी मांझा
जानकारों के अनुसार, देसी मांझा सूत से बनता है और यह अगर शरीर के किसी अंग में फंसता है तो तत्काल टूट जाता है। वहीं, चीनी मांझा जिस अंग में फंसेगा उसको काट देता है। चीनी मांझा नायलॉन का बना होता है। इस पर मैटलिक कोटिंग होती है। इसे बनाने में केमिकल और दूसरी धातुओं का उपयोग भी होता है। इनमें शीशा, गोंद, एल्युमीनियम ऑक्साइड आदि शामिल हैं। इससे यह आसानी से टूटता नहीं है और इसमें ब्लेड जैसी धार होती है। इसके साथ ही चीनी मांझा देसी मांझा से काफी सस्ता होता है। ऐसे में दाम सस्ता और ज्यादा मजबूत होने के कारण चीनी मांझा दालमंडी, औरंगाबाद, नई सड़क, लल्लापुरा, नदेसर, अर्दली बाजार, शिवाला, खोजवां सहित शहर के अन्य इलाकों में धड़ल्ले से बिकता है।
अभी तो मनाया था जन्मदिन, कितनी खुश थी
वाराणसी। 'अभी इसी महीने में ही तो अपना जन्मदिन मनाया था कृतिका ने... कितनी खुश थी उस दिन... अपने नन्हे भाई को दिन भर गोद में उठाए रहती थी... न जाने किसका क्या बिगड़ा था, जो यह सजा मिली...।' यह कहते हुए मासूम के पिता संदीप गुप्ता सोमवार को बिलखने लगे। परिजन उन्हें ढांढस बंधा रहे थे, लेकिन उनका बिलखना देख सभी की हिम्मत जवाब दे जा रही थी।
नदेसर क्षेत्र के घौसाबाद निवासी मोटर पार्ट्स विक्रेता संदीप गुप्ता बीती शनिवार की शाम स्कूटी से अपनी सात वर्षीय बेटी कृतिका के साथ पांडेयपुर क्षेत्र से घर जा रहे थे। पांडेयपुर फ्लाईओवर पर चढ़ते ही स्कूटी में आगे खड़ी कृतिका का गला चीनी मांझा से कटा तो वह जोर से चीखी। इस दौरान संदीप की अंगुली भी कट गई। कृतिका को लेकर संदीप अस्पताल भागे, लेकिन उसकी सांसों ने साथ छोड़ दिया। कृतिका की मां नंदिनी की हालत बेसुधों जैसी हैं। वहीं, दादा, दादी, बुआ और चाचा की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही है। संदीप ने कहा कि आखिर कितनों की मौतों के बाद प्रशासन और पुलिस की आंख खुलेगी। मेरी बेटी ने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उसके साथ ऐसा हुआ...? कहा कि अब भी तो प्रशासन चेत जाए और चीनी मांझा बेचने वाले लोगों के खिलाफ हकीकत में कार्रवाई करे।
पिता का चेहरा देख रहा था मासूम, आंखें खोज रही थी बहन को
कृतिका का छोटा भाई अगस्त महीने में ही साल भर का हुआ है। कृतिका उसे दिन भर गोद में लेकर खेलती रहती थी। संदीप जब भी बेटी की याद में बिलखने लगते हैं तो नन्हा बच्चा अपने पिता के चेहरे को एकटक देखता रह जाता है। परिजनों ने बताया कि शनिवार की शाम से ही वह बहन को घर में न देख कर बेचैन सा है। इस कमरे से उस कमरे देखता है कि आखिरकार बहन कहां चली गई...?
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