परिजनों के साथ क्रिकेटर शिवम दूबे।
शिवम ने अपने पिता के सपने को ही जीवन का ध्येय मान लिया था। घर में ही क्रिकेट खेलने की तैयार की गई, वहीं, सुबह-शाम घंटों प्रैक्टिस होती। शिवम को कोचिंग देने का जिम्मा खुद उनके पिता ने अपने कंधों पर उठाया। बेटे के लिए खास डाइट तैयार की। ग्राउंड में उसे दौड़ना सिखाया। रात में रोज मालिश भी करते। शिवम को रोजाना 500 गेंद फेंकते, यह सिलसिला 10 साल तक चला।
10वीं तक पढ़ाई करने वाले शिवम ने अब क्रिकेट को ही सब कुछ मान लिया था। करीब 14 वर्ष की आयु में शिवम ने चंद्रकांत पंडित से कोचिंग लेना शुरू कर दिया। राजेश दूबे ने बताया कि बेटे को आगे बढ़ाने में वह अपने जींस के कारोबार को नहीं देख सके और धीरे-धीरे वह भी खत्म हो गया। माता माधुरी ने भी हर कदम पर पिता और बेटे का साथ निभाया।
शिवम दूबे ने युवा अवस्था में ही क्रिकेट की दुनिया में एक बड़ा नाम कमा लिया है। शिवम दूबे ने 23 साल की उम्र में फरवरी 2017 में राजस्थान के खिलाफ चेन्नई में विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई के लिए अपनी शुरुआत की। उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान जनवरी 2016 में मुंबई के लिए 20-20 की शुरुआत की।
दूबे का प्रथम श्रेणी में पदार्पण दिसंबर 2017 में हुआ, जब वह कर्नाटक के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में मुंबई के लिए खेले। पहली पारी में, उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना पहला पांच विकेट लिया। 2017 में ही नवंबर में, दूबे ने रेलवे के खिलाफ प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना पहला शतक बनाया। कर्नाटक के खिलाफ अपने अगले मैच में, उन्होंने पांच विकेट लिए, 54 रन पर सात विकेट लिए।