प्रार्थिनी के मुताबिक, कथित अनियमितताओं के चलते उनका कारोबार प्रभावित हुआ। बाजार में लाखों रुपये की बकाया रकम फंसने के साथ ही बड़ी मात्रा में दवाइयां स्टॉक में रह गईं। पुलिस अधिकारियों से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने प्रार्थना पत्र, शपथ पत्र, दस्तावेज और पुलिस आख्या का परीक्षण करने के बाद प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला मानते हुए प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया। अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का निर्देश दिया। थाना प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मामले में अदालत के आदेश का पालन होगा।